ऑस्कर विजेता ‘पीरियड: द एंड ऑफ सेंटेंस’ डाक्यूमेंट्री फिल्म में काम करने वाली स्नेहा ने अमर उजाला को बताया कि महिलाओं के प्रति समाज काफी जागरुक हुआ है। उनके लिए संभावनाओं के अनेक द्वार खुले हैं। लेकिन इसके बाद भी महिलाओं को होने वाली माहवारी के विषय में परिवार के बीच बात नहीं होती। स्वयं महिलाएं भी इसके विषय में अपने घर वालों से बात नहीं करतीं, जिसकी वजह से उनकी परेशानी और अधिक बढ़ती है।
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है, जब लोगों को इसके बारे में खुलकर बात करनी चाहिए। कंपनियों को महिला कर्मचारियों से उनकी माहवारी के दिनों में ज्यादा संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।
यह यात्रा कश्मीर से शुरु होगी। पचास दिनों की यात्रा के दौरान देश के हर राज्य में कम से कम एक दिन का स्टॉप होगा। ठहराव के दौरान इलाके के जिलाधिकारी से मिलकर लोगों को पैड इस्तेमाल करने की जानकारी दी जाएगी। इस कार्यक्रम में स्वामी चिदानंद सरस्वती, साध्वी भगवती सरस्वती और चारु प्रज्ञा भी सहयोग दे रहे हैं।