दिल्ली का वायु प्रदूषण कितना घातक हो चला है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मां के पेट में पल रहा बच्चा रोजाना 25 सिगरेट पीने से निकले धुएं के बराबर नुकसान झेल रहा है। इसी तरह ट्रैफिक पुलिसकर्मी, आटो चालक और एमसीडी कर्मी या दूसरे वे लोग जो एक दिन में कम से कम आठ दस घंटे सड़क या उसके आसपास खुले में अपनी ड्यूटी देते हैं, वे सौ सिगरेट से निकले धुएं के बराबर प्रदूषण को सांस के जरिए अपने अंदर ले रहे हैं।
लाइफकेयर फाउंडेशन के संस्थापक और गंगाराम अस्पताल में सीनियर कंसलटेंट एवं चेस्ट सर्जन डॉ. अरविंद कुमार ने एक खास बातचीत में बताया कि सरकार या कोई राजनीतिक पार्टी वायु प्रदूषण कम करने के जितने भी दावे कर रही है, वे सच्चाई की कसौटी पर खरे नहीं उतरते। इनका कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है। दिल्ली और दूसरे शहरों में पीएम 2.5 का स्तर इतना ज्यादा बढ़ गया है कि उसका प्रभाव मां के पेट में पल रहे बच्चे पर भी पड़ने लगा है। हालांकि वह अभी इस दुनिया में नहीं आया है। लेकिन जन्मते के साथ वह और ज्यादा तेजी से वायु प्रदूषण का प्रकोप झेलने लगता है।
दिल्ली के कुछ इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 900 के पार हो गया है। डॉ. कुमार के मुताबिक प्रदूषण का असर बच्चों पर भी उतना ही पड़ रहा है, जितना बड़ी आयु के लोगों पर पड़ता है। खासतौर पर 15 साल से कम आयु वाले बच्चों को वायु प्रदूषण का अधिक खामियाजा भुगतना पड़ता है। दिल्ली जैसे अत्याधिक प्रदूषण वाले शहर में अगर लोग 10.2 साल अधिक जीना चाहते हैं, तो उन्हें विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन के अनुरूप पार्टिकुलेट मैटर को घटाना होगा।
हालांकि यह काम बहुत मुश्किल है। सरकार अपने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल रही और वायु प्रदूषण के स्तर में करीब 25 फीसदी की कमी को बरकरार रखने में कामयाब हुई, तो ही वायु गुणवत्ता में सुधर होगा। इससे आम भारतीयों की जीवन प्रत्याशा औसतन 1.3 साल बढ़ जाएगी।
उच्चतम न्यायालय की तरफ से गठित पैनल ने शुक्रवार को दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में जन स्वास्थ्य आपातकाल की घोषणा करते हुए पांच नवंबर तक सभी निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध लगा दिया है। पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम व नियंत्रण) प्राधिकरण (ईपीसीए) का कहना है कि दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बेहद खतरनाक स्थिति में जा पहुंचा है। ईपीसीए ने इस स्थिति को 'बेहद गंभीर' श्रेणी में रखा है। पटाखों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
ईपीसीए के अध्यक्ष भूरे लाल ने उत्तरप्रदेश, हरियाणा और दिल्ली के मुख्य सचिवों को लिखे पत्र में कहा कि गुरुवार रात दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता बहुत खराब हो गई है। हम इसे एक जन स्वास्थ्य आपातकाल की तरह ले रहे हैं क्योंकि वायु प्रदूषण का स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। विशेषकर बच्चों के स्वास्थ्य पर इसका खतरनाक प्रभाव पड़ सकता है।