उन्होंने बताया कि राकांपा प्रमुख शरद पवार अगस्त के मध्य से महाराष्ट्र के दौरे पर जाएंगे और वह उन नेताओं में शामिल हैं जो अगले महीने उपलब्ध नहीं होंगे। मुंबई में 'इंडिया' के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, '25-26 अगस्त पर अभी विचार किया जा रहा है, लेकिन हम यह तय करने के लिए तारीखों के एक और सेट पर विचार कर रहे हैं कि हर कोई उपलब्ध रहे।'
शुक्रवार को महा विकास अघाड़ी की एक बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख नाना पटोले ने कहा कि एमवीए नेताओं की अगस्त में रैलियां हैं, जो मानसून के कारण पीछे छूट गई थीं। एमवीए के घटक कांग्रेस, राकांपा और शिवसेना (यूबीटी) की अगले शनिवार को फिर से बैठक होने वाली है।
कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर 26 सदस्यीय विपक्षी गठबंधन के प्रयासों का नेतृत्व कर रही है, लेकिन राज्य विधानसभा में संख्या बल के कारण उसे महाराष्ट्र में जूनियर पार्टनर माना जाता था, जब तककि शिवसेना और राकांपा ने अपने रैंकों में विभाजन नहीं देखा। अजित पवार की बगावत से पहले पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को गठबंधन की 'वज्रमुथ' रैलियों में एमवीए के नेता के रूप में पेश किया गया था। ठाकरे की पार्टी ने विपक्षी गठबंधन की मुंबई बैठक आयोजित करने का बीड़ा उठाया है।
उन्होंने कहा, 'जहां तक हमें बताया गया है, शिवसेना बैठक की तारीखों का समन्वय कर रही है। हमें बताया गया कि यह 25-26 अगस्त है। अब, हम सुनते हैं कि शरद पवार उन दिनों अनुपलब्ध हैं। ये चीजें तब होती हैं जब किसी को 26 दलों के साथ समन्वय करना होता है, कुछ भी असामान्य नहीं है। जब पटना की बैठक की योजना बनाई जा रही थी, तब भी हमें इस मुद्दे का सामना करना पड़ा।'
मोदी संग पवार के मंच साझा करने से पहले ‘इंडिया’ में नाराजगी
विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के नेताओं ने पीएम नरेंद्र मोदी के साथ शरद पवार के मंच साझा करने से पहले नाराजगी जताई है। दरअसल, शुक्रवार को हुई फ्लोर लीडर्स की बैठक में कुछ सांसदों ने शरद व मोदी के एक संयुक्त कार्यक्रम का जिक्र किया। इसमें तिलक स्मारक मंदिर ट्रस्ट की तरफ से पुणे में आयोजित समारोह में एक अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लोकमान्य तिलक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इसमें पवार मुख्य अतिथि की हैसियत से उन्हें सम्मानित करेंगे।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान कुछ सदस्यों ने समारोह में शरद पवार के मुख्य अतिथि होने के मुद्दे को उठाया और इस पर चिंता जताई। उनका तर्क था कि क्योंकि पवार भी पीएम मोदी को लोकमान्य तिलक पुरस्कार से सम्मानित करने वालों में शामिल हैं, इसका विपक्षी एकता के लिहाज से सही संदेश नहीं जाएगा।