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Operation Sindoor: 1971 जंग में शामिल 300+ वीरांगनाओं की कहानी हुई ताजा; कर्तव्य निभाने को आज भी तैयार हैं...

Sat, 31 May 2025 06:55 AM IST
दीपक कुमार शर्मा एजेंसी, अहमदाबाद

सार

गुजरात की वीरांगनाओं ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वे फिर से देश के लिए इसी तरह के कर्तव्य निभाने के लिए तैयार हैं। 26 मई को राज्य के दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इन नायिकाओं के वीरता के जज्बे के कायल हुए बगैर नहीं रह पाए। उन्होंने इन वीरांगनाओं में से जीवित बची 13 महिलाओं से मुलाकात ही नहीं की बल्कि उनका आर्शीवाद भी लिया।
 
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ऑपरेशन सिंदूर के संबंध में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते सेना के अधिकारी (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आज से आधी सदी से भी पहले 1971 भारत- पाकिस्तान जंग में एक ऐसा भी दौर आया था, जब गुजरात के कच्छ के माधापार गांव की साधारण सी 300 से अधिक महिलाएं सेना की मदद के लिए खुद आगे आईं। इन वीरांगनाओं अपने हौसले और साहस से पाक सेना की नष्ट की गई भुज हवाई पट्टी को महज 72 घंटों में दोबारा से तैयार कर डाला था। भले ही जीवित बची इन महिलाओं की उम्र 70 से 80 साल हो गई हो, लेकिन इनके जज्बे और हौसले में 54 साल बाद भी कोई कमी नहीं आई है।

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इनका कहना है कि अगर जरूरत पड़ी तो वे फिर से देश के लिए इसी तरह के कर्तव्य निभाने के लिए तैयार हैं। 26 मई को राज्य के दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इन नायिकाओं के वीरता के जज्बे के कायल हुए बगैर नहीं रह पाए। उन्होंने इन वीरांगनाओं में से जीवित बची 13 महिलाओं से मुलाकात ही नहीं की बल्कि उनका आर्शीवाद भी लिया। पीएम मोदी ने कहा, इन महिलाओं ने केवल 72 घंटों में रनवे का पुनर्निर्माण किया। इससे हमें हवाई हमले फिर से शुरू करने में मदद मिली। मैं भाग्यशाली हूं कि इन वीरांगनाओं ने आज मुझे अपना आशीर्वाद दिया। पीएम मोदी से बातचीत के दौरान इन महिलाओं ने उन्हें सिंदूर का एक पौधा तोहफे में दिया। इसे अब नई दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास में लगाया जाएगा। ऑपरेशन सिंदूर अतीत के पन्नों में दफन हो चुकी इस बहादुरी और देशभक्ति की कहानी को फिर से मौजूदा वक्त के पटल पर ले आया। 

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डर पर हौसले ने पाई जीत
कानबाई विरानी 80 साल की है, लेकिन उनमें अब भी देशभक्ति का जोश युवाओं की तरह उबाल मारते दिखता है। वह कहती हैं, अगर युद्ध छिड़ता है और देश को फिर से उनकी मदद की जरूरत पड़ती है तो माधापार की महिलाएं कोई भी जिम्मेदारी उठा सकती हैं। उन्होंने 1971 का दौर याद करते हुए कहा, हमें सायरन बजने पर छिपने और दूसरे सायरन बजने पर काम फिर से शुरू करने का निर्देश दिया गया था।  
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जब पीएम मोदी ने पूछा केम छो बढ़ा
पीएम से मुलाकात पर विरानी ने कहा, हम जीवित बची महिलाओं ने पीएम को आशीर्वाद दिया और उन्हें हर तरह से समर्थन का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा, मंच पर पीएम ने हमारा अभिवादन किया और पूछा केम छो बढ़ा (आप सभी कैसे हैं?)। मैंने उन्हें बताया कि मेरी उम्र की वजह से मेरी सेहत ठीक नहीं है। उन्होंने तुरंत मुझे अपना ख्याल रखने के लिए कहा। पीएम ने आशीर्वाद पाने के बाद हमारा आभार भी जताया।  

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