साल 2011 की गर्मियों में भारत और पाकिस्तान की सेना के बीच एलओसी पर कुछ हफ्तों के दरम्यान सर्जिकल स्ट्राइक में 13 जवान मारे गए थे, जबकि 6 के सिर काटे गए थे। इनमें से 5 के सिर दोनों देशों के सैनिक अपने-अपने देश ले गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, उस वक्त पाकिस्तानी सैनिकों ने 2 भारतीय जवानों के सिर काटे थे, जबकि भारतीय सैनिक 3 पाकिस्तानी सैनिकों के सिर काटकर ले आए थे।
इस ऑपरेशन के आधिकारिक दस्तावेज, वीडियो और तस्वीरें हासिल करने वाले अंग्रेजी अखबार द हिंदू ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है। कुपवाड़ा की 28 डिवीजन के चीफ और इस ऑपरेशन को अमलीजामा पहनाने वाले रिटायर्ड मेजर जनरल एस. के. चक्रवर्ती ने अखबार से इसकी पुष्टि की है।
कुपवाड़ा के गुगलधर में सेना की चौकी पर राजपूत और कुमाऊं रेजिमेंट के 6 जवानों को चौंकाते हुए पाकिस्तानी सेना ने 30 जुलाई 2011 की दोपहर हमला कर दिया। इस समय 19 राजपूत बटालियन को 20 कुमाऊं रेजिमेंट से रिप्लेस किया जाना था। इसी मौके का फायदा उठाते हुए पाकिस्तानी बॉर्डर एक्शन टीम (BAT) ने हमला कर दिया। हमले के बाद पाकिस्तानी सेना 20 कुमाऊं के हवलदार जयपाल सिंह अधिकारी और लांस नायक देवेंदर सिंह के सिर अपने साथ ले गई। हमले की जानकारी देने वाले 19 राजपूत के एक जवान ने बाद में अस्पताल में दम तोड़ दिया।
भारतीय सेना का 'ऑपरेशन बदला'
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पाकिस्तानी सेना को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारतीय सेना ने ऑपरेशन जिंजर की योजना बनाई, सेना का यह ऑपरेशन अब तक का सबसे घातक अभियान था, जिसे सीमा पार अंजाम दिया गया। बदला लेने के लिए भारतीय सेना ने एयर सर्विलांस और फिजिकल तरीकों का उपयोग किया और अपने टारगेट चिन्हित किए।
भारतीय सेना ने पाकिस्तान की एक पुलिस चौकी और जोर, हिफाजत और लशदत इलाके के पास स्थित आर्मी पोस्ट को लक्ष्य बनाया। सेना की योजना पुलिस चौकी पर हमला करने की थी, ताकि ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाया जा सके।
मिशन की सीक्रेट रिपोर्ट के मुताबिक हमले की योजना को अंजाम देने के लिए अलग-अलग टीमें बनाई गईं। इनमें सर्विलांस, सर्जिकल स्ट्राइक, हमला और बमबारी के लिए टीमें गठित की गईं।
अखबार ने अपने पास एक मौजूद वीडियो की पुष्टि करते हुए रिपोर्ट किया है कि कुपवाड़ा में पाकिस्तानी सेना के हमले के बाद भारतीय सेना को एक पाकिस्तानी आतंकी के पास से एक वीडियो मिला, जिसे घुसपैठ करते हुए मारा गया था। इस वीडियो में पाकिस्तानी सैनिक 'अधिकारी और सिंह' के सिर के साथ खड़े हुए दिखाई देते हैं।
मंगलवार को 'ऑपरेशन जिंजर'
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दो महीने तक लगातार तैयारी के बाद सेना ने 30 अगस्त, मंगलवार को 'ऑपरेशन जिंजर' लॉन्च किया। ऑपरेशन में शामिल एक अधिकारी के मुताबिक 'हमने मंगलवार का दिन इसलिए चुना, क्योंकि करगिल युद्ध सहित पिछले कई मौकों पर हमें जीत मिली थी। हमने ईद से ठीक एक दिन पहले की योजना बनाई क्योंकि पाकिस्तानी इस समय जवाबी हमले उम्मीद कम करते हैं।'
हमले के लिए पैरा कमांडोज के 25 जवान, 29 अगस्त को अपने लॉन्च पैड पर सुबह 3 बजे पहुंच गए और रात के 10 बजे तक वहीं छुपे रहे। इसके बाद उन्होंने एलओसी क्रॉस किया और पाकिस्तानी पुलिस चौकी के पास पहुंच गए। 30 अगस्त को सुबह 4 बजे हमलावर टीम दुश्मन के क्षेत्र में हमले के इंतजार में थी।
अगले एक घंटे में क्षेत्र में माइंस बिछा दी गई और हमले के लिए कमांडोज ने अपनी जगह ले ली। 30 अगस्त को सुबह सात बजे के करीब उन्हें चार पाकिस्तानी सैनिक दिखाई दिए, जिसका नेतृत्व एक जूनियर कमीशंड अधिकारी कर रहा था। भारतीय सेना के जवानों ने उनके हमले की जगह पर पहुंचने का इंतजार किया और फिर माइंस को डेटोनेट कर दिया। धमाके में चारों गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद कमांडोज ने ग्रेनेड से उन पर हमला कर दिया।
'तीन मरे हुए सैनिकों के सिर काट डाले'
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इनमें से एक पाकिस्तानी सैनिक भागते हुए नीचे गिर गया। भारतीय सैनिकों ने अन्य तीन मरे हुए सैनिकों के सिर काट डाले और उनके रैंक चिन्ह, हथियार और दूसरे निजी सामान ले लिए। कमांडोज ने एक शव में आईईडी फिट कर दिया, ताकि अगर कोई उसे उठाए, तो ब्लास्ट हो जाए।
धमाका सुनने के बाद चौकी की ओर दौड़ते आ रहे दो पाकिस्तानी सैनिकों को भारतीय सेना की दूसरी टीम ने मार गिराया। दो अन्य पाकिस्तानी सैनिकों ने दूसरी टीम को फंसाने की कोशिश की, लेकिन पीछे से कवर कर रही तीसरी टीम ने दोनों को मार गिराया।
भारतीय सेना के जवान जब 'ऑपरेशन बदला' को अंजाम देकर लौट रहे थे, उन्होंने पाकिस्तानी सैनिकों के एक ग्रुप को पुलिस चौकी की ओर भागते देखा। थोड़ी ही देर में जवानों को एक धमाके की आवाज सुनाई दी। स्पष्ट था कि यह धमाका पाकिस्तानी सैनिक के शव में फिट किए गए आईईडी का था। एक अध्ययन के अनुसार कम से कम दो या तीन और पाकिस्तानी सैनिक इस धमाके में मारे गए।
'डीएनए का कोई सुराग न बचे'
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यह पूरा ऑपरेशन लगभग 45 मिनट तक चला और भारतीय सेना की टीम सुबह के 7.45 बजे तक हमले की जगह छोड़ एलओसी की ओर चल पड़ी थी। सेना की पहली टीम दोपहर 12 बजे अपने पोस्ट पर पहुंची और आखिरी टीम 2.30 बजे के करीब। सभी टीमें लगभग 48 घंटे तक दुश्मन के इलाके में रहीं, जबकि कम से कम आठ पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया। साथ ही 2 या तीन अन्य पाकिस्तानी सैनिकों को गंभीर रूप से घायल किया। तीन पाकिस्तानी सैनिकों (सुबेदार परवेज, हवलदार आफताब और नायक इमरान) के सिर, तीन एके-47 और अन्य हथियार भारतीय सैनिक तोहफे के रूप में अपने साथ लाए।
सूत्रों के मुताबिक काटे गए सिरों की तस्वीरें उतारी गईं और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर उन्हें जमीन में दबा दिया गया। दो दिन बाद कमांड के सबसे वरिष्ठ जनरल ने टीम से पाकिस्तानी सैनिकों के सिर के बारे में पूछा, 'जब उन्हें पता चला कि काटे गए सिरों को जमीन में दबाया गया है, वह क्रोधित हो गए और सिर को जमीन से निकालकर जलाने को कहा और उसकी राख को किशनगंगा में फेंकने का आदेश दिया। ताकि डीएनए का कोई सुराग न बचें।'