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राजनीति: मुख्यमंत्री बदलने से नहीं दूर होगी छत्तीसगढ़ की 'बीमारी', बघेल-देव में आगे भी जारी रहेगी खींचतान

सार

वरिष्ठ भाजपा नेता और छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरम लाल कौशिक ने कहा, जिस प्रकार से राज्य में सियासी घटनाक्रम नजर आ रहा और प्रदेश में अस्थिरता की स्थिति दिख रही है इससे साफ समझ में आ रहा है कि ये कांग्रेस पार्टी के अंदर कुछ ठीक नहीं चल रहा है...
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भूपेश बघेल और टीएस सिंह देव के साथ राहुल गांधी - फोटो : Agency (File Photo)
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छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार पर चल रहे सियासी संकट के बीच राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शुक्रवार को फिर दिल्ली आ गए और राहुल गांधी से मुलाक़ात की है। दिल्ली जाने से पहले रायपुर एयरपोर्ट पर सीएम बघेल ने कहा कि मुझे दिल्ली बुलाया गया है, इसलिए मैं जा रहा हूं। इधर, प्रदेश में मचे सियासी घमासान पर भाजपा ने कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधा है। नेता प्रतिपक्ष धरम लाल कौशिक ने अमर उजाला से चर्चा करते हुए कहा कि कांग्रेस के भीतर सरकार बनने के बाद से ही वर्चस्व की लड़ाई चल रही है। कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ में नेतृत्व परिवर्तन करें या न करें लेकिन बघेल और टीएस सिंह देव के गुटों के बीच खींचतान बनी रहेगी। दरार कम होने के बजाए बढ़ती ही जाएगी।

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अमर उजाला से चर्चा करते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता और छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरम लाल कौशिक ने कहा, कांग्रेस पार्टी के लोग भाजपा पर आरोप लगाते थे कि राज्य में ढाई साल का कोई भी फार्मूला नहीं है। भाजपा वाले लोग इसे हवा दे रहे हैं। लेकिन अब जिस प्रकार से राज्य में सियासी घटनाक्रम नजर आ रहा और प्रदेश में अस्थिरता की स्थिति दिख रही है इससे साफ समझ में आ रहा है कि ये कांग्रेस पार्टी के अंदर कुछ ठीक नहीं चल रहा है। वहां शुरू से ही ढाई साल के फॉर्मूले को लेकर खींचतान चल रही है।

उन्होंने कांग्रेस पार्टी से सवाल पूछते हुए कहा, छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रभारी पीएल पूनिया ने हाल ही में कहा था कि पार्टी के अंदर 'ऑल इज वेल' है तो फिर सारे विधायकों को दिल्ली दौड़ने की क्या जरूरत है। आज सभी कांग्रेस नेताओं के बयान आ रहे हैं कि किसी भी विधायक को दिल्ली नहीं बुलाया गया है तो फिर विधायकों को दिल्ली जाने की जरूरत क्यों पड़ी रही है। इसका मतलब साफ है कि कांग्रेस पार्टी के भीतर कुछ ठीक नहीं चल रहा है। जिस प्रकार का राज्य में उठापटक दौर चल रहा है उससे प्रदेश का विकास पूरी तरह से रुक गया है। इसका पूरा खामियाजा छत्तीसगढ़ की जनता को भुगतना पड़ रहा है।

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उन्होंने आगे बताया कि सीएम बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव के बीच आपसी खींचतान राज्य में जब से कांग्रेस की सरकार बनी है तब से जारी है। कोविड काल के दौरान कई बार ये देखने में आया है कि स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठकों में मंत्री को ही नहीं बुलाया जा रहा है या कई अहम बैठकों से मंत्री ही नदारद रहे रहे हैं। शुरू से ही इस सरकार में एकजुटता और तालमेल का अभाव नजर आ रहा है। इस सरकार में एक स्वर नहीं है। एक ही विषय पर एक मंत्री का बयान अलग होता है और दूसरे का बिल्कुल अलग होता हैं। कई बार विधानसभा में भी ये चर्चा का विषय बना है।

गौरतलब है कि 2018 में जब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनी थी, तो उस वक्त सीएम पद के लिए भूपेश बघेल और टीएस सिंह देव के नाम रेस में सबसे आगे थे। बाद में पार्टी ने भूपेश बघेल को सीएम बनाया लेकिन ऐसी खबरें आईं थीं कि ढाई-ढाई साल के सीएम के फार्मूले पर बात बनी है। जिसके तहत पहले ढाई साल भूपेश बघेल सीएम रहेंगे और अगले ढाई साल टीएस सिंह देव। भूपेश बघेल के बतौर सीएम कार्यकाल को ढाई साल पूरे हो चुके हैं।

वहीं राज्य में कुछ घटनाक्रम ऐसे हुए हैं कि भूपेश बघेल खेमे और टीएस सिंहदेव खेमे में तनातनी चल रही है। इसके बाद हाल ही में दोनों नेताओं ने दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की थी। हालांकि मुलाकात के बाद भूपेश बघेल और टीएस सिंह देव, दोनों ने ही ढाई-ढाई साल सीएम वाले फॉर्मूले की बात से इंकार किया और कहा कि पार्टी उन्हें जो जिम्मेदारी देगी, वह उसे निभाएंगे।
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