उन्होंने आगे बताया कि सीएम बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव के बीच आपसी खींचतान राज्य में जब से कांग्रेस की सरकार बनी है तब से जारी है। कोविड काल के दौरान कई बार ये देखने में आया है कि स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठकों में मंत्री को ही नहीं बुलाया जा रहा है या कई अहम बैठकों से मंत्री ही नदारद रहे रहे हैं। शुरू से ही इस सरकार में एकजुटता और तालमेल का अभाव नजर आ रहा है। इस सरकार में एक स्वर नहीं है। एक ही विषय पर एक मंत्री का बयान अलग होता है और दूसरे का बिल्कुल अलग होता हैं। कई बार विधानसभा में भी ये चर्चा का विषय बना है।
गौरतलब है कि 2018 में जब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनी थी, तो उस वक्त सीएम पद के लिए भूपेश बघेल और टीएस सिंह देव के नाम रेस में सबसे आगे थे। बाद में पार्टी ने भूपेश बघेल को सीएम बनाया लेकिन ऐसी खबरें आईं थीं कि ढाई-ढाई साल के सीएम के फार्मूले पर बात बनी है। जिसके तहत पहले ढाई साल भूपेश बघेल सीएम रहेंगे और अगले ढाई साल टीएस सिंह देव। भूपेश बघेल के बतौर सीएम कार्यकाल को ढाई साल पूरे हो चुके हैं।
वहीं राज्य में कुछ घटनाक्रम ऐसे हुए हैं कि भूपेश बघेल खेमे और टीएस सिंहदेव खेमे में तनातनी चल रही है। इसके बाद हाल ही में दोनों नेताओं ने दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की थी। हालांकि मुलाकात के बाद भूपेश बघेल और टीएस सिंह देव, दोनों ने ही ढाई-ढाई साल सीएम वाले फॉर्मूले की बात से इंकार किया और कहा कि पार्टी उन्हें जो जिम्मेदारी देगी, वह उसे निभाएंगे।