'वन नेशन वन इलेक्शन' पर बनी रामनाथ कोविंद कमेटी ने सुझाव दिया था कि पहले चरण में केंद्र और राज्य सरकारों के चुनाव एक साथ कराने की पहल की जा सकती है। राष्ट्रीय चुनावों के बाद में सौ दिनों के अंदर निगम और निचले स्तर के चुनाव कराने चाहिए। इससे पूरी चुनावी प्रक्रिया कुछ ही दिनों में समाप्त हो जाएगी और सरकारें-राजनीतिक दल केवल विकास कार्यों के लिए अपना पूरा प्रयास कर सकेंगे।
विकल्प बनाने होंगे
राजनीतिक समीक्षक डॉ. परमबीर सिंह ने अमर उजाला से कहा कि 'वन नेशन वन इलेक्शन' का प्रस्ताव अभी नया है। इसके प्रावधानों के सामने आ जाने के बाद ही यह बताया जा सकेगा कि प्रस्ताव वर्तमान की परिस्थितियों से कितना अलग और कितना प्रभावी है। इसकी खामियों के बारे में भी तभी चर्चा् की जा सकेगी जब इसके सभी नियम-उपनियम जनता की जानकारी में आ जाएंगे।
लेकिन, जिस तरह अभी किसी सरकार के गिरने पर मध्यावधि चुनाव कराने का विकल्प दिया गया है, 'वन नेशन वन इलेक्शन' में सरकार गिरे बिना ही कैसे नई सरकार बनेगी, इस पर स्थिति साफ करनी पड़ेगी। यदि किसी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिलता है तो चुने हुए सांसदों को ही आपसी चुनाव या सहमति से कोई प्रधान चुनने का विकल्प दिया जाता है तो भी इससे आयाराम-गयाराम वाली स्थिति से बचा नहीं जा सकेगा और सरकार में स्थिरता आना संभव नहीं होगा। ऐसे में सरकार को सभी विकल्पों पर विचार करने के बाद में ही कोई बिल लाना चाहिए।