केंद्र सरकार ने दावा किया कि दोनों मरीजों को चिकित्सीय निगरानी में रखा गया है, जबकि इस दावे के कुछ देर बाद बेंगलुरु महानगर पालिका ने बयान जारी किया कि 20 नवंबर को आया 66 वर्षीय मरीज 27 नवंबर को ही देश से जा चुका है। इनके सपर्क में कुल 266 लोग आए थे, जबकि इनमें से किसी में भी कोरोना की पुष्टि नहीं हुई।
देश में गुरुवार को कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट की पुष्टि हो गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में देश में इस वैरिएंट के दो मामले सामने आए हैं। इनमें एक दक्षिण अफ्रीकी नागरिक है और दूसरा स्थानीय स्वास्थ्यकर्मी। हालांकि, मंत्रालय ने लोगों से भय का माहौल न बनाने और कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने की अपील की है।
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केंद्र सरकार ने दावा किया कि दोनों मरीजों को चिकित्सीय निगरानी में रखा गया है, जबकि इस दावे के कुछ देर बाद बेंगलुरु महानगर पालिका ने बयान जारी किया कि 20 नवंबर को आया 66 वर्षीय मरीज 27 नवंबर को ही देश से जा चुका है। इनके सपर्क में कुल 266 लोग आए थे, जबकि इनमें से किसी में भी कोरोना की पुष्टि नहीं हुई। इसके अलावा दूसरा सख्श एक 46 वर्षीय स्वास्थ्यकर्मी है, जिसका कोई यात्रा इतिहास नहीं है। इनके संपर्क में आए पांच लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई है। सभी हल्के लक्षण दिखाई दिए हैं और सभी निगरानी में हैं।
पांच बिंदुओं में जानें देश में ओमिक्रॉन की स्थिति और सतर्कता
कर्नाटक पहुंचे 66 और 46 साल के दो व्यक्तियों में दो दिसंबर को कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट की पुष्टि हुई है।
एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा संचालित 11 हवाईअड्डों पर बुधवार यानी दो दिसंबर को कुल 1,502 अंतरराष्ट्रीय यात्रियों का कोरोना टेस्ट किया गया। राहत की बात यी रही कि इनमें से कोई भी संक्रमित नहीं पाया गया।
देश के 30 से अधिक हवाई अड्डों को इंडियन सार्स-कोव2 कंसोर्टियम ऑन जीनोमिक्स (इन्साकॉग) की लैब से जोड़ दिया गया है। हवाई अड्डों पर ही जांच के बाद जीनोम सीक्वेंसिंग पर ध्यान दिया जा रहा है।
जिन देशों में आवश्यक समूह का टीकाकरण पूरा नहीं हुआ है, वहां यह स्वरूप तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन भारत में अब तक 125 करोड़ से अधिक लोगों को टीके लग चुके हैं।
स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने ओमिक्रॉन के खतरे को लेकर देश के एयरपोर्ट तथा बंदरगाह अधिकारियों के साथ बैठक की ताकि देश में प्रवेश के रास्तों पर वायरस की निगरानी की जा सके।
मुंबई में जोखिम वाले देशों से आए पांच और यात्री गुरुवार को कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। बीएमसी के अधिकारियों ने यह जानकारी दी। इनके सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेज दिए गए हैं।
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पुराने उपायों से ही बचाव: भार्गव
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने कहा कि कोविड सतर्कता के पुराने नियमों के जरिए ही नए वैरिएंट से बचा जा सकता है। हवादार माहौल में रहना जरूरी है। इस समय भय नहीं, जिम्मेदारी से लड़ाई को आगे लेकर जाना है। देश के सभी वैज्ञानिक और लैब जांच में जुटे हैं। नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल का कहना है कि नए वैरिएंट को लेकर काफी सवाल हैं जिनके जवाब अभी हमारे पास नहीं हैं लेकिन मौजूदा साक्ष्यों के आधार पर यही कहा जा सकता है कि चेहरे पर मास्क लगाने और दो गज की दूरी का पालन करने के साथ टीकाकरण ही सबसे बेहतर विकल्प है। अब सबसे बड़ी लड़ाई आम नागरिकों की है। महामारी को फैलने से रोकने के लिए नियमों का पालन करना होगा।
देश में 63 फीसदी डेल्टा वैरिएंट ही
नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) के निदेशक डॉ. सुजीत कुमार ने बताया कि अभी तक भारत में 63 फीसदी मामले डेल्टा वैरिएंट से जुड़े हैं। नौ फीसदी में एल्फा, 0.44 फीसदी में बीटा, 0.004 फीसदी में गामा और डेल्टा से जुड़े एवाई वैरिएंट के 17 फीसदी मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनके अलावा कप्पा और अन्य वैरिएंट से जुड़े 11 फीसदी मामले हैं।
अभी देश की स्थिति
देश के कुल सक्रिय मरीजों में केरल की 44.88 और महाराष्ट्र की 11.09 फीसदी हिस्सेदारी है।
देश के 10 राज्यों के 18 जिलों में अभी कोरोना की संक्रमण दर पांच से 10 फीसदी के बीच।
तीन राज्य मिजोरम, केरल और अरुणाचल प्रदेश के 15 जिलों में संक्रमण दर 10 फीसदी से अधिक।
79.16 करोड़ (84.30 फीसदी) वयस्क आबादी को पहली और 45.92 करोड़ (49 फीसदी) को दूसरी खुराक दी जा चुकी है।