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कोरोना की दवा: इस सप्ताह से देश के मेडिकल स्टोर्स पर मिलने लगेगी ये मेडिसिन, 1400 रुपये में होगा पूरा कोर्स

सार

मोलुलाइफ को पहले दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों में भेजा जाएगा जहां संक्रमण के मामले अधिक हैं। इसके बाद इसका वितरण छोटे केंद्रों में किया जाएगा। मरीजों को पांच दिनों तक एक दिन में आठ गोलियां लेने की आवश्यकता होती है...
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कोरोना की दवा: मोलनुपिराविर - फोटो : Agency
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विस्तार
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ओमिक्रॉन संक्रमण के बीच लोगों के लिए अच्छी खबर है। अब कोविड-19 की गोली मोलनुपिराविर इस हफ्ते मेडिकल स्टोर्स पर मिलनी शुरू हो जाएगी। कंपनियों ने देश के शहरों में दवा भेजनी शुरू कर दी है। इसी बीच कई कंपनियों के बीच दवाइयों की कीमत को लेकर खींचतान भी शुरू हो गई है। हाल ही में डीसीजीआई ने डॉ. रेड्डीज, सन फार्मा, सिप्ला, हीटेरो, टॉरेंट और ऑप्टिमस समेत 13 कंपनियों को इस दवा को बनाने और बेचने की अनुमति दी है। ये कंपनियां अपने ब्रांड के नाम से देशभर में इस दवा को बेच सकती हैं। इस साल की शुरुआत में इन कंपनियों ने भारत समेत दुनिया के 100 से ज्यादा देशों में मोलनुपिराविर की मैनुफैक्चरिंग और बेचने के लिए मर्क के साथ डील साइन की थी।

प्रमुख ब्रांड की दवाओं की कीमत रुपयों में

कंपनी                           दवा का नाम        पूरा कार्स   (रुपये)             प्रति कैप्सूल (रुपये)
रेड्डीज लैबोरेटरीज            मोल फ्लू             1400                 35
मैनकाइंड फार्मा              मोलुलाइफ          1400                  35
सन फार्मा                      मोलक्सवीर 1520 38
एमक्योर फार्मा                लिजुविरा 1750 43.75
सिप्ला                            सिपमोलनु 2000 50
हिटेरो                            मोवफॉर 2450 62.25
 

जल्द ही छोटे केंद्र पहुंचेगी मोलुलाइफ

मैनकाइंड फार्मा ने बाजार में अपने मोलनुपिराविर ब्रांड के मोलुलाइफ की कीमत 35 रुपये प्रति गोली या पूरे कोर्स के लिए 1,400 रुपये में पेश करेगी। जबकि बाजार में सबसे किफायती ब्रांड, हैदराबाद की दवा कंपनी डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज (डीआरएल) ने मंगलवार को इसी कीमत पर डीआरएल के मोल फ्लू की पेशकश की, जिसकी कीमत 40 गोलियों के फुल कोर्स के लिए 1,400 रुपये तय की गई है।  

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मैनकाइंड फार्मा की दवा के दामों को लेकर कहना है कि कुछ दवाओं को किफायती रखना महत्वपूर्ण है, न कि उनसे किसी प्रकार का मुनाफा कमाना। हर कोई कोविड से संक्रमित हो सकता है चाहे वह गरीब ही क्यों न हो। हम चाहते हैं कि हमारी दवा सस्ती हो ताकि हर कोई इसका इस्तेमाल कर सके। इसकी वजह से अस्पताल में भर्ती होने की संभावना कम हो जाती है। ऐसे में जरूरतमंदों के लिए अस्पताल में भर्ती करने के खर्च का बोझ कम हो जाता है। मोलुलाइफ को पहले दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों में भेजा जाएगा जहां संक्रमण के मामले अधिक हैं। इसके बाद इसका वितरण छोटे केंद्रों में किया जाएगा। मरीजों को पांच दिनों तक एक दिन में आठ गोलियां लेने की आवश्यकता होती है।

इधर, हैदराबाद की दवा कंपनी डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज डीआरएल का कहना है कि, कंपनी मोलफ्लू ब्रांड के तहत सबसे कम कीमत वाली मोलनुपिराविर गोली 200 एमजी की पेशकश करेगी। डॉ रेड्डीज के मोल फ्लू की एक गोली की कीमत 35 रुपये होगी और एक पत्ते में इसकी 10 गोलियां मिलेगी। पांच दिनों में 40 गोलियों के फुल कोर्स की कीमत 1,400 रुपये होगी जो मरीजों के लिए उपलब्ध सबसे किफायती इलाज विकल्पों में से एक है।

देश के 600 जिलों में पहुंचेगा स्टॉक

जबकि देश की सबसे बड़ी दवा निर्माता कंपनी सन फार्मा ने अपने ब्रांड मोलक्सविर 38 रुपये प्रति गोली के हिसाब से पेश की है, जिससे मरीजों के लिए इलाज की कुल लागत 1,520 रुपये हो गई है। सन फार्मा के अनुसार, हम पूरे भारत में डॉक्टरों और मरीजों को मोलक्सविर की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए टोल फ्री हेल्पलाइन शुरू कर रहे हैं। वहीं, पुणे का एमक्योर ग्रुप लिजुविरा नाम से मोलनुपिराविर गोली की पेशकश कर रहा है, जिसकी मार्केटिंग इसकी सहयोगी कंपनी जुवेंटस फार्मा करेगी। इलाज के पूरे कोर्स के लिए लिजुविरा की कीमत 1,750 रुपये होगी। सिप्ला ने अपने ब्रांड सिपमोलनु की कीमत 2,000 रुपये प्रति कोर्स रखी है। वहीं हैदराबाद की कंपनी हेटेरो ने पहले ही 40 गोलियों के कोर्स के लिए 2,490 रुपये में अपने ब्रांड मोवफॉर की पेशकश की है। हालांकि मोल फ्लू जैसे कुछ ब्रांड दवा की दुकानों में अगले सप्ताह के शुरू में उपलब्ध हो जाएंगे। अभी से ही कई ब्रांडों के माल मिलने शुरू हो गए हैं। आने वाले दिनों में देश के करीब 600 जिलों में एक हफ्ते के भीतर स्टॉक पहुंच जाएगा।

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भारत की 13 कंपनियों को उच्च जोखिम वाली श्रेणी में कोविड-संक्रमित वयस्कों के लिए आपात स्थिति में सीमित इस्तेमाल के लिए मर्क और रिजबैक द्वारा तैयार एंटीवायरल दवा मोलनुपिराविर के निर्माण और उसकी मार्केटिंग के लिए 28 दिसंबर को दवा नियामक से मंजूरी मिल गई। मोलनुपिराविर के लिए मंजूरी मिलना अहम है क्योंकि यह कोविड के लिए किफायती दवा बन सकती है। यह दवा राइबोन्यूक्लिक एसिड पॉलिमरेज नामक वायरस के हिस्से को लक्षित करती है, जो ओमिक्रोन स्वरूप में म्यूटेशन के बाद भी ज्यादा नहीं बदला है।

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