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बूढ़े बैल की अनूठी सेवा करके किसान परिवार ने पेश की मिसाल

Tue, 27 Sep 2016 03:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुन्नौर (संभल)
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- फोटो : amarujala
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तीस साल पहले सिकरौरा गांव के किसान पप्पू यादव के परिवार में पांच साल के किशोर बैल के रूप में आया था। प्यार से घर वालों ने उसका नाम राजू रखा। राजू घर वालों से इतना हिला-मिला कि लोग उसे अपने परिवार का सदस्य ही समझने लगे। बूढ़ा होने तक राजू का रुतबा घर में बड़े-बुजुर्ग का हो गया। आदर से उसे घर वाले उसे दाऊ कहने लगे।
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35 साल की उम्र में दाऊ के निधन पर घर वालों ने उसका अंतिम संस्कार घर के सदस्य की तरह की किया। उसकी समाधि बनवाई। सोमवार को हुए उसके श्राद्ध में तीन हजार लोगों को जिमाया। सिकरौरा में बैल दाऊ की मौत के बाद बनी उसकी समाधि और श्राद्ध पर लगभग तीन हजार लोगों को भोजन कराना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।

सिकरौरा गांव के पप्पू यादव ने करीब 30 साल पहले गांव से ही पांच वर्ष का बछड़ा खरीदा था। जब तक वह जवान और ताकतवर था उससे घर वालों ने खेती-बाड़ी का काम लिया। पप्पू यादव के छोटे भाई गुलाब यादव को उससे कुछ अधिक ही प्रेम हो गया। गुलाब सिंह ने उसका नाम राजू रखा। राजू चारे के साथ रोटी भी खाता था।
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'​हैंडपंप का पानी नहीं पीता था, ट्यूबवेल चलाना पड़ता था'

- फोटो : amarujala
​हैंडपंप का पानी नहीं पीता था। उसके लिए ट्यूबवेल चलाना पड़ता था। 35 साल तक होते-होते वह कमजोर हो गया। किसान परिवार में उसकी देखभाल परिवार के बुजुर्ग की तरह होने लगी। 28 अगस्त को उसकी मौत हो गई थी।

परिजनों ने इंसानों की तरह उसकी समाधि बनाई। सभी रस्में अदा कीं। उसके मोक्ष  के लिए सोमवार को उसका श्राद्ध किया तेरहवीं थी। उसकी समाधि पर फोटो रखकर सभी ने पुष्प अर्पित किए। इस मौके पर करीब तीन हजार से अधिक लोगों को जिमाया गया। 

एक बैल की औसत आयु लगभग 14 साल होती है। अगर यह बैल 35 की उम्र में मरा है तो अपवाद है। ऐसा कम ही देखने में आया है। 
एके शर्मा, पशु चिकित्सा अधिकारी, चंदौसी   

दाऊ (बैल) मेरे परिवार का सदस्य था, उसकी अंत्येष्टि और श्राद्ध परिवार के एक सदस्य की तरह करके मैने अपना फर्ज पूरा किया। मैं तो कहता हूं, ऐसा हर व्यक्ति को करना चाहिए।
गुलाब सिंह यादव,  किसान सिकरौरा भूड़़ (गुन्नौर)
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