तीस साल पहले सिकरौरा गांव के किसान पप्पू यादव के परिवार में पांच साल के किशोर बैल के रूप में आया था। प्यार से घर वालों ने उसका नाम राजू रखा। राजू घर वालों से इतना हिला-मिला कि लोग उसे अपने परिवार का सदस्य ही समझने लगे। बूढ़ा होने तक राजू का रुतबा घर में बड़े-बुजुर्ग का हो गया। आदर से उसे घर वाले उसे दाऊ कहने लगे।
35 साल की उम्र में दाऊ के निधन पर घर वालों ने उसका अंतिम संस्कार घर के सदस्य की तरह की किया। उसकी समाधि बनवाई। सोमवार को हुए उसके श्राद्ध में तीन हजार लोगों को जिमाया। सिकरौरा में बैल दाऊ की मौत के बाद बनी उसकी समाधि और श्राद्ध पर लगभग तीन हजार लोगों को भोजन कराना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।
सिकरौरा गांव के पप्पू यादव ने करीब 30 साल पहले गांव से ही पांच वर्ष का बछड़ा खरीदा था। जब तक वह जवान और ताकतवर था उससे घर वालों ने खेती-बाड़ी का काम लिया। पप्पू यादव के छोटे भाई गुलाब यादव को उससे कुछ अधिक ही प्रेम हो गया। गुलाब सिंह ने उसका नाम राजू रखा। राजू चारे के साथ रोटी भी खाता था।