बालासोर ट्रेन दुर्घटना में बाहानगर बाजार रेलवे स्टेशन में बर्बादी का मंजर देखने को मिला है। हर तरफ ट्रेन के मलवे बिखरे पड़े हैं। इन मलवों के बीच एक नोटबुक भी पड़ा हुआ था, जिसमें एक तरफ खुबसूरत पेंटिंग बनी हुई थी।
ओडिशा के बालासोर में शुक्रवार को भयावाह ट्रेन हादसा हुआ। इस हादसे में करीबन 280 से भी ज्यादा यात्रियों की जान चली गई। यह अबतक भारत में हुए ट्रेन दुर्घटनाओं में चौथी सबसे घातक हादसा है। ट्रेनों की कोच की हालत बता रही है कि यह हादसा कितना भयावाह था।
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पटरियों और उसके आसपास यात्रियों के जूते-चप्पल खाने-पीने की सामाने, पानी की बोतलें और अन्य सामान बिखरी पड़ी ती। इसी बीच पटरियों पर एक नोटबुक भी मिला, जिसमें पेंटिंग के साथ कुछ प्रेम-भरी कविताएं भी लिखी हुई थी।
पटरियों पर मिला प्रेम भरी कविताओं वाला नोटबुक
बालासोर ट्रेन दुर्घटना में बाहानगर बाजार रेलवे स्टेशन में बर्बादी का मंजर देखने को मिला है। हर तरफ ट्रेन के मलवे बिखरे पड़े हैं। इन मलवों के बीच एक नोटबुक भी पड़ा हुआ था, जिसमें एक तरफ खुबसूरत पेंटिंग बनी हुई थी तो दूसरी तरफ बंगाली में प्रेम भरी कविताएं लिखी हुई थी। इस हादसे की वजह से नोटबुक के पन्ने जरुर फट गए थे लेकिन उसमें लिखी कविताएं साफ-साफ पढ़ा जा सकता है।
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नोटबुक में लिखा था-
ओल्पो-ओल्पो मेघ थेके हाल्का बृष्टि होए
छोटो-छोटो गोल्पो थेके भालोबासा सृष्टि होए।
इसका मतलब है- 'हल्के-हल्के बादलों से हल्की बारिश होती है, छोटे-छोटे कहानियों से प्यार की सृष्टि होती है।'
इस नोटबुक में एक दूसरी अधूरी कविता भी मिली, जिसमें लिखा था-
भालोबेसेई तोके चाई साराखोन,
आचिस तुई मोनेर साथे।
जिसका मतलब है- 'प्यार में सिर्फ तुम ही चाहिए, मेरे मन में सिर्फ तुम ही हो।'
नोटबुक पर किसी का नाम नहीं
इस नोटबुक पर किसी भी लेखक या लेखिका का नाम नहीं लिखा हुआ था। इसके वायरल होते ही लोगों ने अपनी संवेदनाएं व्यक्त की है। हालांकि, अबतक कोई भी नोटबुक को लेने नहीं आया है। यह भी मालूम नहीं कि जिन्होंने इसे लिखा है वह इस हादसे में जीवित बच भी पाए हैं या नहीं। पुलिस ने बताया कि उनके रिश्तेदार भी अभी तक सामने नहीं आए हैं।