ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार एक बार फिर खोला गया। चार दशक से भी अधिक समय से बंद इस खदान में करोड़ों रुपये मूल्य के आभूषण और अन्य रत्न सहेजे गए हैं। सरकार इनकी सूची तैयार कराएगी। बृहस्पतिवार को सात बड़ी संदूकों में सामान स्थानांतरित करने में सात घंटे का समय लगा।
पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार बृहस्पतिवार को फिर से खोला गया। रत्न भंडार में मौजूद आभषूणों और कीमती सामान को अस्थायी स्ट्रॉन्ग रूम में स्थानांतरित किया गया। इससे पहले रविवार को 46 साल बाद रत्न भंडार को खोला गया था।
विज्ञापन
अधिकारियों ने बताया कि रत्न भंडार को सुबह नौ बजकर 51 मिनट पर फिर खोला गया। यह एक हफ्ते में दूसरी बार है, जब कोषागार को खोला गया है। रत्न भंडार के भीतरी कक्ष से जेवरात को मंदिर परिसर में ही बने अस्थायी कोषागार में सफलतापूर्वक स्थानांतरित करने में सात घंटे का समय लगा। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के प्रमुख अरविंद पाधी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इसके लिए लकड़ी और स्टील के अलमारी के साथ ही सात संदूकों का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी
सामान स्थानांतरित करने से पहले की पूजा
भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहन भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पूजा-अर्चना करने के बाद रत्न भंडार से कीमती सामान को दूसरी जगह रखने के लिए गठित समिति के सदस्यों ने सुबह नौ बजे मंदिर में प्रवेश किया। समिति अध्यक्ष एवं ओडिशा हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस विश्वनाथ रथ ने कहा, हमने भगवान जगन्नाथ से कोषागार के आंतरिक कक्ष में रखे सभी कीमती सामान को स्थानांतरित करने के लिए आशीर्वाद मांगा।