सीएम माझी ने कहा कि 'मेरे सीएम बनने से करीब एक महीने पहले की घटना है। रायसुन और गोपीनाथपुर पंचायत के निवासी पीने के पानी के संकट को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे थे। 2 मई को लोगों ने विरोध में राष्ट्रीय राजमार्ग 20 को बंद कर दिया।'
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शुक्रवार को एक घटना को याद करते हुए कहा कि एक बार उन्हें पुलिस इंस्पेक्टर ने थाने से बाहर कर दिया था। इस घटना का जिक्र कर सीएम ने अधिकारियों से सरकारी संस्थानों में सम्मान और जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपील की। लोक सेवा भवन में जिलाधिकारियों का दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम मोहन चरण माझी ने पुरानी घटना को याद किया।
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घटना को याद कर क्या बोले सीएम
सीएम माझी ने कहा कि 'मेरे सीएम बनने से करीब एक महीने पहले की घटना है। रायसुन और गोपीनाथपुर पंचायत के निवासी पीने के पानी के संकट को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे थे। 2 मई को लोगों ने विरोध में राष्ट्रीय राजमार्ग 20 को बंद कर दिया। उस दौरान ओडिशा में आदर्श आचार संहिता लागू थी। इलाके के थाना प्रभारी त्रिनाथ सेठी ने प्रदर्शनकारियों को बातचीत के लिए थाने बुलाया। मैं भी उनके साथ गया, लेकिन पुलिस इंस्पेक्टर ने मेरी मौजूदगी पर सवाल उठाए और बतौर विधायक मेरी भूमिका को नकार दिया। पुलिस अधिकारी ने कहा कि राज्य में चुनाव आचार संहिता लागू है और इसके बाद पुलिस अधिकारी ने मुझे थाने से बाहर कर दिया।'
अधिकारियों को निर्देश- नागरिकों से सम्मानपूर्वक व्यवहार करें
सीएम माझी ने कहा कि क्या कोई विधायक, जो उम्मीदवार भी है, वह लोगों की समस्या लेकर पुलिस थाने नहीं जा सकता? मुझे बहुत शर्मिंदगी हुई। सीएम ने बताया कि इसके बाद उन्होंने थाने के बाहर ही पुलिस इंस्पेक्टर के बाहर धरना प्रदर्शन भी किया था। सीएम ने कहा कि भगवान जगन्नाथ के आशीर्वाद से मैं मुख्यमंत्री बन गया। ऐसे में मैं अब आम लोगों की पीड़ा का अंदाजा ही लगा सकता हूं। मैंने इंस्पेक्टर को माफ कर दिया और मेरा मानना है कि उसने दबाव में ऐसा किया था। सीएम ने कहा कि पुलिस थानों में आम नागरिकों से सम्मानपूर्वक व्यवहार करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिकायत करने आने वाले लोगों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और इसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा निर्देश जारी किए जाने चाहिए।