सिनर्जी कॉन्क्लेव में 'ग्लोबल रिस्क्स एंड इंटेलीजेंस' पर एक सत्र में मोसाद के पूर्व निदेशक ने जोर देकर कहा कि संघर्ष से बचने में खुफिया विफलता का दूरगामी प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि पश्चिम-एशिया क्षेत्र में सामने आ रहे संकट को 'वैश्विक संकट' के रूप में संदर्भित किया जाना चाहिए क्योंकि 'इसमें बढ़ने की क्षमता है'।
अरद ने कहा, इस अप्रत्याशित हमले ने इस्राइल को रणनीतिक स्तर पर इस्राइल को हैरान कर दिया। हमले की प्रकृति इस्राइली खुफिया की स्थिति पर प्रकाश डालती है, जो हमले की भविष्यवाणी करने में विफल रही। नतीजतन, इस्राइल रणनीतिक रूप से न सोचने का परिणाम चुका रहा है।
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि अचानक हमले और उसके परिणाम ने उनके सिस्टम की विफलता को उजागर किया है। उन्होंने कहा, हमने इस तरह के हमले का मुकाबला करने के लिए जरूरी चेतावनी प्रदान करने के लिए अपने तकनीकी साधनों के महत्व को बढ़ा-चढ़ाकर बताया। हमारे पास पर्याप्त खुफिया जानकारी की कमी थी।
फलस्तीनी आतंकवादी समूह हमास ने सात अक्तूबर को इस्राइल पर हमला किया था, जिसमें कम से कम 1,200 लोग मारे गए थे और 240 अन्य का अपहरण कर लिया गया था। हालांकि, अरद ने इस विचार का विरोध किया कि हमास यह सुनिश्चित करने में सफल रहा है कि इस्राइल की खुफिया जानकारी को वह चेतावनी न मिले जिसकी उन्हें आवश्यकता थी।
उन्होंने आगे कहा, हम दुश्मन को जानने में भी असफल रहे। हमने उन जिहादी समूहों के चरित्र को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। यह दोहराते हुए कि संकटों ने एक वैश्विक जोखिम पैदा किया है, उन्होंने कहा कि यह न केवल इस्राइल को प्रभावित करता है, बल्कि हर लोकतांत्रिक देश को भी प्रभावित करता है जो इस तरह के हमलों का शिकार है।