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OBC Certificate Dispute: सिंगल मदर के बच्चों को हक देने की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

Mon, 23 Jun 2025 03:28 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट में सिंगल मदर के बच्चों को मां की जाति के आधार पर ओबीसी सर्टिफिकेट देने की मांग पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए अंतिम सुनवाई 22 जुलाई को तय की है। साथ ही सभी राज्य सरकारों को याचिका की कॉपी भेजने के निर्देश दिए हैं ताकि वे अपना पक्ष रख सकें। 
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : ANI
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विस्तार
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देश में सामाजिक न्याय और बराबरी को लेकर एक अहम मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। यह मामला उन बच्चों से जुड़ा है, जिनकी परवरिश अकेली मां कर रही हैं और वे ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) वर्ग से आती हैं। लेकिन मौजूदा नियमों के तहत इन बच्चों को ओबीसी सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाता। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार से जवाब तलब किया है।
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पिता की जाति पर आधारित है मौजूदा नियम
दरअसल, मौजूदा समय में ओबीसी सर्टिफिकेट के लिए बच्चे के पिता, दादा या चाचा की जाति प्रमाणित करना जरूरी होता है। यही वजह है कि जिन बच्चों की परवरिश अकेली मां कर रही हैं, उन्हें ओबीसी सर्टिफिकेट मिलने में परेशानी होती है, भले ही मां खुद ओबीसी वर्ग से क्यों न हो। इसी व्यवस्था को चुनौती देते हुए यह याचिका दायर की गई है।

SC-ST में लागू है मां की जाति का आधार
याचिका में इस बात को भी प्रमुखता से उठाया गया है कि एससी (अनुसूचित जाति) और एसटी (अनुसूचित जनजाति) वर्ग में यदि कोई महिला अकेली मां है, तो उसके बच्चों को मां की जाति के आधार पर जाति प्रमाणपत्र मिल जाता है। लेकिन ओबीसी वर्ग के मामले में ऐसा नहीं है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह भेदभाव संविधान में मिले समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
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दत्तक बच्चों को भी सर्टिफिकेट में दिक्कत
याचिका में यह भी बताया गया है कि अगर कोई सिंगल मदर किसी बच्चे को गोद लेती हैं और वह महिला खुद ओबीसी वर्ग से आती हैं, तब भी उनके दत्तक बच्चे को ओबीसी सर्टिफिकेट नहीं मिलता। कारण वही है कि मौजूदा नियम सिर्फ पिता की जाति पर आधारित हैं। ऐसे में यह प्रावधान सिंगल मदर और उनके बच्चों के अधिकारों का हनन करता है।

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22 जुलाई को अंतिम सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे 22 जुलाई को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे अपनी याचिका की कॉपी सभी राज्य सरकारों को भेजें, ताकि सभी पक्ष इस मुद्दे पर अपना पक्ष रख सकें। इससे पहले केंद्र और दिल्ली सरकार से भी विस्तृत जवाब मांगा गया है।

कानूनी जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अगर स्पष्ट दिशा-निर्देश देता है, तो इससे ओबीसी वर्ग में सिंगल मदर के बच्चों को उनका हक मिल सकेगा। यह फैसला न सिर्फ दिल्ली, बल्कि पूरे देश में समानता और सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकता है। अब सभी की नजरें कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं।


 
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