पूरे देश में सबसे ज्यादा आवारा कुत्तों की संख्या उत्तर प्रदेश में है, जबकि दूसरे स्थान पर उड़ीसा तीसरे स्थान पर महाराष्ट्र है। देशभर में हुए पशुधन गणना के दौरान आवारा कुत्तों की संख्या का यह आंकड़ा केंद्रीय मत्स्य पालन पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय ने जुटाया है। इस दौरान कुछ राज्य ऐसे भी रहे जहां पर स्ट्रीट डॉग्स की संख्या एक भी नहीं पाई गई।
पशुधन गणना के आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा स्ट्रीट डॉग्स इस वक्त उत्तर प्रदेश में हैं। उत्तर प्रदेश में 2019 की गणना के मुताबिक 20,59,261 स्ट्रीट डॉग्स हैं। जबकि यह आंकड़ा 2012 में 41,79,245 के करीब था। मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक बीते सात सालों में उत्तर प्रदेश में आवारा कुत्तों की जनसंख्या पर नियंत्रण पाने के लिए तमाम तरह के उपाय किए गए। इसके अलावा लोगों को जागरूक भी किया गया। यही वजह रही कि उत्तर प्रदेश में आवारा कुत्तों की संख्या 2012 की गणना की तुलना में 2019 में आधी से भी कम हो गई। जबकि पूरे देश में दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा आवारा कुत्तों की संख्या उड़ीसा में पाई गई। आंकड़ों के मुताबिक 2019 में उड़ीसा में स्ट्रीट डॉग्स की संख्या 17,34,399 पाई गई। उड़ीसा में आवारा कुत्तों की संख्या पिछली गणना की तुलना में दोगुनी से अधिक हो गई है। आंकड़े बताते हैं कि उड़ीसा में 2012 की पशुधन गणना के मुताबिक आवारा कुत्तों की संख्या 862520 थी। जो अब बढ़कर साढ़े लाख के करीब पहुंच गई है।
पूरे देश में उत्तर प्रदेश और उड़ीसा के बाद तीसरे नंबर पर स्ट्रीट डॉग्स की संख्या महाराष्ट्र में पाई गई। महाराष्ट्र में 2019 की गणना के मुताबिक यहां की सड़कों-गलियों में 12,76,399 आवारा कुत्ते पाए गए, जबकि 2012 की गणना में यहां पर आवारा कुत्तों की संख्या इससे थोड़ी कम थी। हालांकि महाराष्ट्र में आवारा कुत्तों की संख्या में कोई खास बढ़ोतरी दर्ज नहीं की गई है। आंकड़ों के मुताबिक राजस्थान में पूरे देश में चौथे नंबर पर सबसे ज्यादा स्ट्रीट डॉग पाए गए। पूरे राजस्थान में 12,75,596 स्ट्रीट डॉग 2019 की गणना में सामने आए। जबकि 2012 की गणना में राजस्थान में आवारा कुत्तों की संख्या 11,51,015 हुआ करती थी। पूरे देश में पांचवें नंबर पर डॉग की संख्या कर्नाटक में है। केंद्रीय मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक कर्नाटक में 2019 की पशुधन गणना में आवारा कुत्तों की संख्या 11,41,173 पाई गई, जो 2012 की गणना की तुलना में काफी ज्यादा है। 2012 में कर्नाटक की सड़कों और गलियों पर आवारा कुत्तों की संख्या 8,76,081 थी।
पूरे देश के अलग-अलग राज्यों में स्ट्रीट डॉग्स की हुई गणना में कुछ राज्य ऐसे भी पाए गए, जहां पर 2019 की गणना में एक भी स्ट्रीट डॉग नहीं मिला। दादर नगर हवेली में 2019 की गणना में एक भी स्ट्रीट डॉग नहीं पाया गया। इस राज्य ने स्ट्रीट डॉग्स पर सरकारी योजना अनुरूप तमाम कार्य किए और नतीजा हुआ कि 2012 में इस राज्य 2173 आवारा कुत्ते थे। जो कि 2019 की गणना तक आते-आते शून्य को गए। इसी तरीके से लक्षदीप में एक भी स्ट्रीट डॉग नहीं पाया गया। लक्षदीप ने अपना 2012 का रिकॉर्ड मेंटेन रखा। 2012 में हुई पशुधन गणना में लक्षदीप में एक भी स्ट्रीट डॉग नहीं मिला था। इसी तरीके से पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में भी एक भी स्ट्रीट डॉग नहीं पाया गया। हालांकि 2012 में मणिपुर में 23 स्ट्रीट डॉग थे। पूर्वोत्तर के राज्य अरुणाचल प्रदेश में 2012 में हुई पशुधन गणना के मुताबिक स्ट्रीट डॉग की संख्या 464 थी, जबकि 2019 की गणना में यह आंकड़ा 11,383 के करीब पहुंच गया।