कोरोनावायरस से लड़ाई में भारत को जल्द ही एक और वैक्सीन का तोहफा मिल सकता है। दरअसल, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) द्वारा विकसित नई कोरोना वैक्सीन 'कोवोवैक्स' को 12-17 साल के बच्चों पर इस्तेमाल के लिए राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समिति (NTAGI) की तरफ से मंजूरी मिल गई है। अब NTAGI के प्रस्ताव को सरकार के सामने रखेगा, जिसके बाद भारत की दवा नियंत्रक महानिदेशक (डीसीजीआई) इसके आपात इस्तेमाल की जल्द मंजूरी दे सकता है।
किसी वैक्सीन पर निर्णय लेने के लिए टीकाकरण के लिए गठित NTAGI के पास त्रिस्तरीय प्रणाली है। यह कार्य समूह प्रथम स्तर का है। कार्य समूह द्वारा वैक्सीन के डेटा की सुरक्षा और असर देखने के बाद, दूसरे स्तर की स्थायी तकनीकी उप-समिति (STSC) समीक्षा और चर्चा करेगी। इसके बाद एसटीएससी अंतिम निर्णय लेने वाले तीसरे समूह को अपना निर्णय देगी।
भारत के औषधि नियामक ने पिछले साल 28 दिसंबर को वयस्कों को आपातकालीन स्थितियों में कोवोवैक्स टीके के सीमित उपयोग के लिए मंजूरी दी थी तथा 12-17 आयु वर्ग में कुछ शर्तों के साथ नौ मार्च को मंजूरी दी थी। सूत्रों ने बताया, "एनटीएजीआई के कोविड-19 कार्य समूह ने पहले कोवोवैक्स से संबंधित आंकड़ों की समीक्षा की थी और इसे मंजूरी दी थी। एनटीएजीआई की स्थायी तकनीकी उप-समिति की शुक्रवार को बैठक हुई और उसने सिफारिश की है कि 12-17 वर्ष आयु वर्ग के लिए इस टीके का उपयोग किया जा सकता है।’’
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के सरकार और नियामक मामलों के निदेशक प्रकाश कुमार सिंह ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को हाल ही में एक पत्र लिखकर 12 साल से अधिक उम्र के बच्चों के टीकाकरण अभियान में कोवोवैक्स को शामिल किए जाने का अनुरोध किया था। गौरतलब है कि भारत में 12-14 वर्ष की आयु के बच्चों का टीकाकरण 16 मार्च से शुरू हआ था।
भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने 28 दिसंबर को वयस्कों के लिए आपात स्थिति में सीमित उपयोग के लिए कोवोवैक्स को मंजूरी दी थी। हालांकि, इसे अभी देश के टीकाकरण अभियान में शामिल नहीं किया गया है। एसआईआई में सरकारी और नियामक मामलों के निदेशक प्रकाश कुमार सिंह ने डीसीजीआई को 21 फरवरी को आवेदन देकर 12 से 17 साल की उम्र के बच्चों के लिए कोवोवैक्स के लिए ईयूए मांगी थी।