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भारत की इस तिकड़ी ने दिखाया पाकिस्तान को आईना, इस रणनीति से पहुंचाई मंसूबों को चोट

Wed, 11 Sep 2019 06:38 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला
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NSA Dobhal, S Jaishankar, Vijay Gokhle - फोटो : AmarUjala
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भारत की कूटनीतिक किलेबंदी के आगे पाकिस्तान का हर षडयंत्र धराशायी हो रहा है। इस कूटनीति के रचनाकार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस जयशंकर और विदेश सचिव विजय गोखले हैं, जिनकी तिकड़ी ने इसे काफी मजबूत बना दिया है। कूटनीति के जानकार दो दिन पहले एनएसए डोभाल के जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर दिए गए वक्तव्य को काफी गंभीरता से ले रहे थे। एक राजनयिक सूत्र के मुताबिक डोभाल तब भविष्य की पिच तैयार कर रहे थे।

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आम तौर पर कम बोलने, मीडिया पब्लिसिटी से दूर रहने वाले डोभाल ने समय और आवश्यकता को चुनकर पाकिस्तान समेत दुनिया को संदेश दे दिया था। बताते हैं संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में जहां इसकी बानगी देखने को मिली है, वहीं संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद पाकिस्तान की हर चाल धरी रह जाएगी।

ऐसे की मजबूत किलेबंदी

  • जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा और वैधानिक बदलाव भारत का अंदरुनी मामला।
  • भारत ने वैधानिक बदलाव का कदम उठाने से पहले सुरक्षा, नागरिकों की सहूलियत समेत अन्य मसलों पर व्यापक होमवर्क करके कदम बढ़ाया। एनएसए डोभाल खुद लगातार 12 दिन तक राज्य में रहकर नजर रखते रहे। विदेश मंत्री ने कूटनीतिक मोर्चा संभाला। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शिखर राजनीतिक नेतृत्व को साधा।
  • जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ मामला पूरी तरह से द्विपक्षीय और इसके समाधान का आधार शिमला समझौता, लाहौर घोषणा पत्र।
  • जम्मू-कश्मीर का आतंकवाद पाकिस्तान की जमीन से चल रहे आतंकवादी संगठनों के कारण और पाकिस्तान की सरकार, खुफिया एजेंसी आईएसआई का ऐसे संगठनों को संरक्षण, वित्तीय पोषण तथा प्रशिक्षण में हर संभव मदद।
  • 26 नवंबर 2008 को मुंबई में आतंकी हमला, पठानकोट एयरबेस पर हमला, उरी में सैन्य शिविर पर हमला, पुलवामा में भारतीय सुरक्षा बलों पर हमला पाकिस्तान की जमीन से चल रहे आतंकी संगठनों का नतीजा। इन आतंकी संगठनों ने इससे पहले भी भारतीय संसद पर हमला करने जैसी तमाम आतंकी घटनाओं को अंजाम दिया है।
  • पाकिस्तान और वहां चल रहे आतंकी संगठन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाली आर्थिक तथा सैन्य मदद का भारत के विरुद्ध आतंकवाद के पालन-पोषण में उपयोग करते हैं। पाकिस्तान के आतंकी संगठन वित्तीय पोषण पाने के लिए सामाजिक उद्देश्य की संस्थाओं का भी सहारा लेते हैं।
  • भारत पड़ोसी देशों के साथ मधुर संबंधों का पक्षधर। मजबूत, शांतिपूर्ण पाकिस्तान का हिमायती, लेकिन सीमा पार से आतंकवाद की शह और शांति वार्ता के प्रयास मंजूर नहीं। इसलिए पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई करनी होगी।

एनएसए डोभाल ने दिये थे ये बयान

  • एनएसए डोभाल ने दो दिन पहले बताया कि पाकिस्तान की सीमा में 230 आतंकी घुसपैठ की फिराक में हैं। कुछ आतंकियों के घुसने की भी सूचना है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों से भारत संचार क्षेत्र समेत अन्य प्रतिबंध हटा सकता है, बशर्ते पाकिस्तान सीमापार सक्रिय अपने संचार माध्यमों को बंद करे।
  • जम्मू-कश्मीर में शांति, नागरिक सहूलियतों और राज्य के सतत विकास के लिए भारत प्रतिबद्ध। हिंसा, बंद, झड़प, प्रदर्शन जैसी कोई अप्रिय घटना नहीं। एक भी नागरिक ने अपनी जान नहीं गवाई। राज्य की जनता केंद्र सरकार के फैसले के साथ। भारत राज्य में मानव अधिकारों की सुरक्षा, संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध।
  • एनएसए डोभाल ने इस तरह का स्टेटमेंट जम्मू-कश्मीर के वैधानिक बदलाव, व्यापक होमवर्क, महीने भर से अधिक समय की शांति देखने के बाद दिया। उनका यह बयान रूस समेत तमाम देशों की यात्रा, राजनयिक स्तर पर मिले समर्थन तथा राष्ट्राध्यक्षों के बयान के बाद आया है।
  • एनएसए ने यह बयान संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद, संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र तथा पाकिस्तान की कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने की कोशिशों को देखते हुए दिया ताकि मानव अधिकार के मुद्दे पर भारत को घेरा न जा सके और पाकिस्तान के षडयंत्रों को अंतरराष्ट्रीय सहानुभूति पाने के प्रयासों से वंचित किया जा सके।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ऐसे तैयार की रणनीति

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने विदेश सचिव विजय गोखले के साथ जम्मू-कश्मीर के वैधानिक बदलाव के बाद कूटनीतिक स्थिति की रुपरेखा तैयार की थी। भारत लगातार अपनी इस स्थिति पर कायम रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के शहर बियारेत्ज से लेकर अपने संवाद में इसी रणनीति को बनाए रखा। भारत का स्पष्ट कहना है कि जम्मू-कश्मीर अभिन्न हिस्सा होने के चलते राज्य में वैधानिक बदलाव उसका आंतरिक मामला है। इससे अंतरराष्ट्रीय मूल्य, मान्यता, मानदंड का किसी तरह से कोई उल्लंघन नहीं हुआ है।

इसलिए इसमें पाकिस्तान समेत दुनिया के किसी तीसरे सदस्य के हस्तक्षेप का कोई स्थान नहीं बनता। भारत ने चीन के सामने भी यही पक्ष रखा है और उसे बताने का प्रयास किया है कि उसके इस आंतरिक वैधानिक बदलाव से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से सटी नियंत्रण रेखा, अंतराष्ट्रीय सीमा और चीन से लगी वास्तिविक नियंत्रण रेखा की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है।

ये है प्रधानमंंत्री मोदी तैयारी

एनएसए, विदेश मंत्री, विदेश सचिव की तिकड़ी ने जो मॉडल तैयार किया है, उसमें भारत का परोक्ष रूप से कहना है कि कोई तीसरा पक्ष नसीहत न दे। पाकिस्तान समेत कश्मीर में मानवाधिकारों की दुहाई देने वाले देशों के लिए भारत का रुख काफी सख्त है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भी भारत का पक्ष रख रही सचिव (ईस्ट) ने इसी को आधार बनाकर पाकिस्तान को करारा जवाब दिया है। समझा जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसी तर्ज सितंबर के आखिरी सप्ताह में संयुक्त राष्ट्र महासभा में वक्तव्य देकर पाकिस्तान को आईना दिखाएंगे।

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