अमेरिका का यह जवाब है या हताशा
अमेरिका ने तालिबान से आखिरी उड़ान भरने के बाद सफाई दी है कि यदि उनके सैनिक 10 दिन और तालिबान में रहते तब भी जिन नागरिकों को बाहर निकालना था, उन्हें नहीं निकाल पाते। लोग फिर भी निराश होते और यह एक कठिन स्थिति होती। अमेरिका के इस बयान में उसकी मजबूरी, हताशा, हार तीनों साफ दिखाई दे रही है। भारत जैसे उन देशों के लिए बड़ा झटका है जो दुनिया की महाशक्ति के विश्वास पर अफगानिस्तान के निर्माण में अपना योगदान दे रहे थे।
तालिबान के पास हैं अत्याधुनिक हथियार
अफगानिस्तान में तालिबान के लड़ाकों के पास अमेरिका के छोड़े अत्याधुनिक हथियार, साजो सामान हैं। अमेरिकी सैनिकों द्वारा छोड़े गए बख्तरबंद वाहन, चिनूक हेलीकाप्टर, गुणवत्ता की राइफलें समेत सब कुछ। प्रो. एसडी मुनि कहते हैं कि उनके पास हथियार हैं। उनका अभी तक का इतिहास सभी को पता है। वह अपने देश में इस्लामिक कानून लागू करने की घोषणा पहले ही कर चुके हैं। हां, पिछली बार सरकार चलाने के तरीके से वह सबक लेकर कुछ बदलाव के साथ अफगानिस्तान में भविष्य के शासन की रूपरेखा बना सकते हैं। यह देखने वाली बात होगी। फिलहाल अभी स्थिति बहुत साफ नहीं है। एनबी सिंह का कहना है कि अमेरिका के जाने के बाद अगले एक सप्ताह में वहां कुछ बड़े बदलाव होने की उम्मीद है। इसी पता चल सकेगा कि आगे की स्थितियां कौन सा आकार लेंगी।