एक तरफ वायु प्रदूषण के प्रबल जिम्मेदार माने जा रहे डीजल वाहनों पर न्यायालयों के जरिए शिकंजा कसा जा रहा है वहीं दूसरी तरफ सरकार और ऑटो मोबाइल इंडस्ट्री अपने घाटे को लेकर चिंतित हैं। इंडस्ट्री की समस्या को लेकर केंद्रीय भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय ने पर्यावरणीय अदालत नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में याचिका दाखिल कर मांग की है कि एनजीटी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर अब किसी और शहर में 2000 सीसी से अधिक क्षमता वाले नए डीजल वाहनों की बिक्री और रजिस्ट्रेशन पर प्रतिबंध न लगाए। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में 2000 सीसी क्षमता वाले नए डीजल वाहनों की बिक्री और रजिस्ट्रेशन पर पाबंदी लगा रखी है।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने यह मामला मंगलवार को विचार के लिए पेश किया जाएगा। बेंच इस याचिका पर वायु प्रदूषण के मामले के दौरान विचार करेगी। सोमवार को वायु प्रदूषण मामले की सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि वह इस मामले से जुड़ी सभी याचिकाओं पर मंगलवार को विचार करेंगे। मंत्रालय ने अपनी याचिका में कहा है कि ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री उत्सर्जन के लिए तय मानकों का पालन कर रहे हैं।
अभी तक प्रभावी है सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने बीते वर्ष 16 दिसंबर, 2015 को दिल्ली-एनसीआर में 2000 सीसी औतर उससे अधिक क्षमता वाले डीजल एसयूवी और प्राइवेट कारों के रजिस्ट्रेशन और बिक्री पर रोक लगा दिया था। यह आदेश पहले 31 मार्च, 2016 तक प्रभावी था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इसे 30 अप्रैल तक के लिए बढ़ा दिया। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को ग्रीष्म अवकाश के बाद अगली सुनवाई तक प्रभावी रहने का निर्देश दिया था।
भारी उद्योग नहीं चाहता पाबंदी के आदेश का विस्तार
मेक इन इंडिया अभियान की दुहाई
डीजल गाड़ियों की खरीद पर है रोक
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डीजल वाहनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश पर भारी उद्योग मंत्रालय का कहना है कि यदि इस आदेश को आधार बनाकर एनजीटी जिन 11 शहरों को लेकर वायु प्रदूषण की सुनवाई कर रही है, यदि वहां भी डीजल वाहनों की बिक्री और रजिस्ट्रेशन पर पाबंदी लगाएगी तो ऑटो मोबाइल इंडस्ट्री की ग्रोथ पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ऑटो मोबाइल इंडस्ट्री की बड़ी हिस्सेदारी (करीब 47 फीसदी) है। इसका विकास देश की अर्थव्यवस्था को दुरूस्त रखने के लिए बेहद जरूरी है। इतना ही नहीं प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए ऑटो मोबाइल इंडस्ट्री देश में पांचवा सबसे बड़ा सेक्टर है।
मंत्रालय ने अपनी याचिका में कहा है कि मेक इन इंडिया अभियान के निर्देश के तहत सरकार पर्यावरण को ध्यान रख टिकाऊ आर्थिक विकास के फंडे पर काम कर रही है। प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संतुलन के लिए कई उपाय किए जा रहे हैं। यदि और किसी भी शहर में डीजल वाहनों की बिक्री पर पाबंदी लगती है तो रोजगार के अवसरों को भी धक्का लगेगा। मसलन देश में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सबसे ज्यादा रोजगार के अवसर ऑटो मोबाइल इंडस्ट्री मुहैया कराती है।
केरल में 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों पर पाबंदी
हाल ही में केरल में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए सूबे के छह शहरों में एनजीटी की कोच्चि पीठ ने 10 साल से ज्यादा पुराने वाहनों पर पाबंदी लगाई है। इससे पहले एनजीटी की प्रधान पीठ ने दिल्ली-एनसीआर में भी 10 साल पुराने डीजल वाहनों पर पाबंदी का आदेश दिया था। इसके बाद बीते वर्ष दिसंबर में एनजीटी ने दिल्ली-एनसीआर में नए डीजल वाहनों की बिक्री और रजिस्ट्रेशन पर रोक लगा दिया था।