इस साल अक्तूबर में दक्षिण भारत के मुख्य क्षेत्रों में पूर्वोत्तर मानसून की बारिश बेहद कम हुई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने मंगलवार को इस बारे में जानकारी दी। आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 1901 के बाद ऐसा छठवीं बार है जब दक्षिण भारत के मुख्य क्षेत्रों में सबसे कम बारिश हुई। इसके साथ ही मौसम विभाग ने उत्तर-पश्चिम और पश्चिम-मध्य क्षेत्रों के कुछ क्षेत्रों को छोड़कर भारत के अधिकांश हिस्सों के लिए नवंबर में मौसम को लेकर भी भविष्यवाणी की है।
उन्होंने यह भी कहा कि 1980 से 2022 तक के आंकड़ों के विश्लेषण से यह जानकारी मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि आंकड़ों से यह भी पता चला है कि तमिलनाडु और इसके आसपास के इलाकों में उत्तर-पूर्वी मानसून की बारिश शुरू होने में देरी की प्रवृत्ति देखी गई है।
1901 के बाद छठी बार सबसे कम हुई पूर्वोत्तर मानसून वर्षा
आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि अक्तूबर में दक्षिण प्रायद्वीप के मुख्य क्षेत्रों जैसे तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, तमिलनाडु और पुडुचेरी, दक्षिण आंतरिक कामताका और केरल के पांच उपविभागों में पूर्वोत्तर मानसून वर्षा 1901 के बाद छठी बार सबसे कम हुई। उन्होंने इसके पीछे की वजह भी बताई। महापात्र ने कहा कि अल नीनो और सकारात्मक हिंद महासागर डिपोल वाले सालों में तमिलनाडु और आसपास के क्षेत्रों में अक्टूबर के महीने में कम वर्षा होती है।
नवंबर में गर्म रहेगा तापमान
इसके साथ ही, आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने उत्तर-पश्चिम और पश्चिम-मध्य क्षेत्रों के कुछ क्षेत्रों को छोड़कर भारत के अधिकांश हिस्सों के लिए नवंबर में मौसम को लेकर भी भविष्यवाणी की। उन्होंने कहा कि अधिकांश भारत में नवंबर में न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक होने की उम्मीद है। नवंबर में पूरे देश में बारिश लंबी अवधि के औसत का सामान्य 77से 123 प्रतिशत होने की संभावना है।
उन्होंने कहा कि प्रायद्वीपीय भारत के दक्षिणी हिस्सों के कुछ इलाकों और उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों और पूर्व-मध्य, पूर्व और उत्तर-पूर्व भारत के कई हिस्सों में इस माह में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है। आईएमडी ने कहा कि नए वैश्विक पूर्वानुमानों के मुताबिक, इस दौरान अल नीनो की स्थिति जारी रहने की संभावना है और आने वाले महीनों के दौरान सकारात्मक हिंद महासागर डिपोल
की स्थिति कमजोर होने की संभावना है।
क्या है हिंद महासागर डिपोल?
बता दें कि पश्चिमी हिंद महासागर का पूर्वी हिंद महासागर की तुलना में बारी-बारी से गर्म व ठंडा होना ही हिंद महासागर डिपोल कहलाता है। हिंद महासागर डिपोल को भारतीय नीनो भी कहा जाता है। हिंद महासागर डिपोल भारतीय मानसून को सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों प्रकार से प्रभावित करता है। हिंद महासागर डिपोल भारतीय मानसून के साथ-साथ आस्ट्रेलिया के ग्रीष्मकालीन मानसून को भी प्रभावित करता है।
प्राकृतिक जलवायु घटना है अल नीनो
वहीं, अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जो मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान के सामान्य से अधिक गर्म होने की वजह से होती है।