ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा में 1997 मेंअस्पताल में ब्लास्ट (बाएं) और नोएडा के ट्विन टावर में हुआ विस्फोट।
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उत्तर प्रदेश के नोएडा में आज ट्विन टावर में ब्लास्ट करा कर इसे जमींदोज कर दिया गया। इससे पहले ही अधिकारियों ने एहतियात बरतते हुए ट्विन टावर के आसपास की इमारतों और इलाके को खाली करा लिया। ट्विन टावर के करीब 500 मीटर दूर तक क्षेत्र में लोगों के रहने पर भी मनाही रखी गई। बताया जाता है कि अधिकारियों ने बिल्डिंग के आसपास को खाली कराने का फैसला किसी भी अनहोनी को रोकने के लिए लिया।
गौरतलब है कि ट्विन टावर के आसपास सुरक्षा सुनिश्चित करने की वजह लोगों को गंभीर चोट या धूल-धुएं से होने वाली अन्य किसी परेशानी से बचाना था। दुनिया में अब तक जितनी जगहों पर हाई-राइज ब्लास्ट के जरिए गिराई गई हैं, उन सभी जगहों पर इसी तरह के एहतियात बरते जाते हैं। इसकी वजह है ऑस्ट्रेलिया में 25 साल पहले हुई एक घटना, जब बिल्डिंग ब्लास्ट को देखने के लिए इसके आसपास इकट्ठा हुए स्थानीय लोगों को चोटें आई थीं और एक 12 साल की बच्ची की मौत तक हो गई थी।
किसी ऊंची इमारत के ब्लास्ट के दौरान आमतौर पर उसके आसपास का इलाका खाली करा दिया जाता है। लेकिन ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा में जुलाई 1997 में जब एक अवैध अस्पताल को ब्लास्ट के जरिए गिराया जाना था, तो अधिकारियों से भीड़ को रोकने में जबरदस्त चूक हो गई। यहां बिल्डिंग को गिरते देखने हजारों की भीड़ जुटी थी, जिसे दूर करने में स्थानीय प्रशासन की तरफ से लापरवाही हुई। नतीजा- इमारत के जमींदोज होने के बाद इसके मलबे की चपेट में आकर नौ लोग बुरी तरह जख्मी पाए गए, जबकि एक 12 साल की एक बच्ची की मौत हो गई थी।
तब मीडिया रिपोर्ट्स में अफसरों के हवाले से दावा किया गया था कि जिस कंपनी को इमारत गिराने का जिम्मा सौंपा गया था, उसने वादा किया था कि बिल्डिंग का मलबा ब्लास्ट की जगह से 50 कदम से ज्यादा नहीं जाएगा। इसी वजह से इमारत के आसपास भी सिर्फ 200 मीटर का क्षेत्र ही खाली कराया गया था। लेकिन मलबे की चपेट में आने से जिस लड़की की मौत हुई, वह इमारत से 400 कदम दूर थी। चश्मदीदों का कहना था कि मलबा ब्लास्ट साइट से 500 मीटर दूर तक गिरा था।