इंसाफ की देवी की पहचान जानने की कोशिश में एक अर्जी राष्ट्रपति के दफ्तर से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक गई मगर माकूल जवाब नहीं मिला। मुख्य सूचना आयुक्त ने अब आरटीआई दाखिल करने वाले रामपुर के दानिश खान को बताया है कि इस बाबत कोई लिखित दस्तावेज उपलब्ध नहीं है।
आरटीआई कार्यकर्ता दानिश ने सात मार्च 2014 को सूचनाधिकार के तहत राष्ट्रपति के सूचना अधिकारी से न्याय की प्रतीक देवी के बारे में जानकारी मांगी थी। उन्होंने पूछा था कि न्याय की प्रतीक देवी कौन हैं? राष्ट्रपति भवन से जवाब आया कि आपके सवाल का पत्र विधि न्याय मंत्रालय को भेजा गया है, यह जानकारी वहीं से प्राप्त होगी।
18 मार्च को विधि न्याय मंत्रालय के अनुभाग अधिकारी ने सवाल सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार के पास भेज दिया। सुप्रीम कोर्ट ने भी उक्त जानकारी होने से इंकार कर दिया।
सूचना न मिलने पर दानिश ने सात मई 2014 को सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार को पत्र लिखा और ‘न्याय की प्रतीक देवी’ के बारे में जानकारी मांगी। सुप्रीम कोर्ट के कहने पर जानकारी प्राप्त करने के लिए दानिश ने अपील भी दायर की।
जवाब में कहा गया कि इंसाफ का तराजू लिए, आंखों पर काली पट्टी बांधे देवी के बारे में कोई लिखित जानकारी उपलब्ध नहीं है। आरटीआई के जवाब में यह कहा गया कि संविधान में भी न्याय के इस प्रतीक चिह्न के बारे में कोई जानकारी दर्ज नहीं है।
20 जुलाई 2016 को मुख्य सूचना आयुक्त राधा कृष्ण माथुर ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए दानिश खान से बात की और ऐसी किसी तरह की लिखित जानकारी न होने के बारे में बताया।