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Exclusive: मंदिरों और अल्पसंख्यकों पर हुए हमले में ‘इंसाफ नहीं’, बांग्लादेश की पत्रकार से जानिए पूरी कहानी

प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Tue, 19 Oct 2021 06:10 PM IST

सार

बांग्लादेश में मंदिरों और अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर हमलों की खबरों के बीच मंगलवार को ढाका में एक बड़े विरोध प्रदर्शन का आयोजन होने वाला है। जिसमें वहां के सामाजिक संगठन, सिविल सोसाइटी और पत्रकारों के भी शामिल होने की संभावना है। क्यों हो रहे हैं अल्पसंख्यकों पर हमले और कैसे हैं बांग्लादेश के हालात, इसी मुद्दे को लेकर ‘अमर उजाला डिजिटल’ ने बांग्लादेश की जानी-मानी टीवी पत्रकार मुन्नी साहा से से जानने की कोशिश की। 
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बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों के विरोध में प्रदर्शन करते लोग - फोटो : social Media
बांग्लादेश में पहले दुर्गा पंडाल और बाद में हिंदू मंदिरों में हुई तोड़फोड़ के बाद अल्पसंख्यकों पर हमले अब भी जारी हैं। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दुर्गा पूजा के मौके पर हिन्दू मंदिरों पर हमले के दो दिन बाद दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने और अल्पसंख्यकों को सुरक्षा देने की बात कही। वहीं बांग्लादेश के गृहमंत्री असदुज्जमां खान कमाल ने सोमवार को कहा कि उनके यहां सांप्रदायिक सौहार्द की हर कीमत पर रक्षा की जाएगी।

हालांकि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमले अब भी नहीं रुके हैं, बल्कि ऐसी घटनाओं ने उनमें असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। घातक धार्मिक हिंसा को लेकर बांग्लादेश में सैकड़ों विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। हिंदू समूहों और अन्य लोगों ने ढाका में कल भी विरोध प्रदर्शन किया था और इस धार्मिक हिंसा को समाप्त करने की अपील की। हमने वहां के हालात को समझने के लिए बांग्लादेश की वरिष्ठ टीवी पत्रकार मुन्नी साहा से फोन पर बातचीत की।


सवाल-क्या वजह है कि दुर्गापूजा के समय से हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले हो रहे हैं?

जवाब-ऐसा नहीं है कि यह पहली बार हुआ है, ऐसा 10-12 सालों से हो रहा है। कुछ कट्टपंथी तत्व जानबूझ कर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए ठीक दुर्गापूजा के समय ऐसा करते हैं। ऐसा हर साल हो रहा है। यह धार्मिक अल्पसंख्यक बनाम बहुसंख्यक समाज का मसला है।

सवाल-यदि 10-12 सालों से ऐसे हमले हो रहे हैं तो सरकार इसे रोकने के लिए क्या कदम उठा रही है? 

जवाब- सरकार हिंसा भड़काने के दोषियों की धड़-पकड़ और उन्हें कानून के शिकंजे में लाने के दावे करती है लेकिन इनमें ज्यादतर महज कागजी बातें है। सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं मिलता। यहां तक कि इस तरह की धार्मिक हिंसा पर जब हम स्टोरी चलाते हैं तो हम पर यह आरोप लगाए जाते हैं कि एकतरफा स्टोरी छापी जा रही है। ऐसे मामलों में अल्पसंख्यकों को कोई न्याय नहीं मिलता। 
 

 
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बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों के विरोध में प्रदर्शन करते लोग - फोटो : social Media
बांग्लादेश में पहले दुर्गा पंडाल और बाद में हिंदू मंदिरों में हुई तोड़फोड़ के बाद अल्पसंख्यकों पर हमले अब भी जारी हैं। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दुर्गा पूजा के मौके पर हिन्दू मंदिरों पर हमले के दो दिन बाद दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने और अल्पसंख्यकों को सुरक्षा देने की बात कही। वहीं बांग्लादेश के गृहमंत्री असदुज्जमां खान कमाल ने सोमवार को कहा कि उनके यहां सांप्रदायिक सौहार्द की हर कीमत पर रक्षा की जाएगी।

हालांकि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमले अब भी नहीं रुके हैं, बल्कि ऐसी घटनाओं ने उनमें असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। घातक धार्मिक हिंसा को लेकर बांग्लादेश में सैकड़ों विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। हिंदू समूहों और अन्य लोगों ने ढाका में कल भी विरोध प्रदर्शन किया था और इस धार्मिक हिंसा को समाप्त करने की अपील की। हमने वहां के हालात को समझने के लिए बांग्लादेश की वरिष्ठ टीवी पत्रकार मुन्नी साहा से फोन पर बातचीत की।

सवाल-क्या वजह है कि दुर्गापूजा के समय से हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले हो रहे हैं?

जवाब-ऐसा नहीं है कि यह पहली बार हुआ है, ऐसा 10-12 सालों से हो रहा है। कुछ कट्टपंथी तत्व जानबूझ कर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए ठीक दुर्गापूजा के समय ऐसा करते हैं। ऐसा हर साल हो रहा है। यह धार्मिक अल्पसंख्यक बनाम बहुसंख्यक समाज का मसला है।

सवाल-यदि 10-12 सालों से ऐसे हमले हो रहे हैं तो सरकार इसे रोकने के लिए क्या कदम उठा रही है? 

जवाब- सरकार हिंसा भड़काने के दोषियों की धड़-पकड़ और उन्हें कानून के शिकंजे में लाने के दावे करती है लेकिन इनमें ज्यादतर महज कागजी बातें है। सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं मिलता। यहां तक कि इस तरह की धार्मिक हिंसा पर जब हम स्टोरी चलाते हैं तो हम पर यह आरोप लगाए जाते हैं कि एकतरफा स्टोरी छापी जा रही है। ऐसे मामलों में अल्पसंख्यकों को कोई न्याय नहीं मिलता। 
 

 

बांग्लादेश के इस्कॉन मंदिर में मुस्लिम कट्टरपंथियों ने हमला कर दिया। इसमें कई हिंदुओं को बुरी तरह से चोट लगी। - फोटो : अमर उजाला
सवाल- आप मानती हैं कि हिंदू अल्पसंख्यकों पर इस तरह के हमले जानबूझ किए जाते हैं।  

जवाब- अल्पसंख्यकों पर होने वाले हमले एक तरह का संगठित अपराध है। पुरानी स्क्रिपट को बार-बार दोहराया जाता है। वे धार्मिक लोग नहीं है। ऐसा लगता है कि इन लोगों पर कानून का वश नहीं चलता है। सब कुछ सोच-समझ कर दुर्गापूजा के दौरान ही किया जाता है ताकि अल्पसंख्यकों को डराया जा सके। 
 
सवाल- ऐसे हमलों की वजह क्या केवल कट्टरपंथी विचारधारा है?  
जवाब- कुछ जगहों पर ऐसा राजनीतिक कारणों से भी हो रहा है। हमारे यहां कोई मजबूत विपक्ष  नहीं है। जो इस तरह के मामलों को उठा सके या विरोध- प्रदर्शन कर सकें। 

सवाल- क्या वहां के हिंदू समुदाय में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। 
जवाब- जाहिर है, हिंसा की ऐसी घटनाएं किसी को भी परेशानी कर सकती हैं। हिंदू अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना है, क्योंकि जब भी उनके साथ ऐसा कुछ होता है तो वे डर जाते हैं। गरीब लोग हैं, फिर उनके नाम पर राजनीति होने लगती है तो वे असहज हो जाते हैं।
 

बांग्लादेश मंदिर - फोटो : PTI
सवाल- एक पूजा मंडप से क़ुरान मिलने के बाद देश के विभिन्न जिलों में पूजा मंडपों और मंदिरों पर हमले होने की घटनाएं बढ़ी हैं, कुरान मिलने की बात में कितनी सच्चाई है?

जवाब- सब फर्जी बातें है। फेक न्यूज है। जब सोशल मीडिया नहीं था तब भी ऐसे ही अफवाहें उड़ाई जाती थीं। सब सोची-समझी बात है। जबकि पहले ऐसा नहीं था। बांग्लादेश अमन चैन पसंद करने वाला देश था, लेकिन जब किसी भी चीज पर कट्टरता हावी होती है तो वह सबसे पहले अमन-चैन को ही बर्बाद करता है।

सवाल-बांग्लादेश में हुई ऐसी घटनाओं के कारण भारत भी चिंता में है। पश्चिम बंगाल के कई जिलों में भी अलर्ट जारी किया गया है। आप इसे किस तरह देखती हैं?

जवाब- दुनिया के किसी भी हिस्से में किसी भी इंसान या जीवित प्राणी पर होने वाली हिंसा निंदनीय है। मेरा मानना है कि बेशक इस तरह के हमलों के बाद वे असुरक्षा महसूस करते हैं, लेकिन बांग्लादेश के हिंदू भी अपने देश से उतना ही प्यार करते हैं जितने कि भारत के अल्पसंख्यक। हमारे यहां के हिंदू भाग कर पश्चिम बंगाल चले जाएंगे, ऐसा नहीं है। वे अपना देश नहीं छोड़ सकते हैं।  

 

बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना - फोटो : पीटीआई
सवाल-बांग्लादेश को आजाद कराने में भारत की सबसे अहम भूमिका रही। क्या अल्पसंख्यकों पर हमला करने वाले इस योगदान को भूल गए हैं?
 

जवाब- इसका जवाब तो वही दे सकते हैं, जो ऐसा कर रहे हैं लेकिन एक आम बांग्लादेशी भारत को हमेशा अपना अच्छा दोस्त समझता है और भारत के योगदान के प्रति हमारे मन में बहुत सम्मान है। जो धर्मनिरपेक्ष सोच रखते हैं और जो मानते है कि बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक इसी देश के नागरिक हैं, दिक्कत उनके साथ नहीं है। दिक्कत तो वहां हो जो हर बात को धर्म के चश्मे से देखते हैं। एक तरफ विकास के मामले में तेजी से बढ़ता हुआ देश बन रहे हैं और दूसरी तरफ ऐसी घटनाएं हो रही हैं। देश को इस पर गंभीरता से सोचना होगा कि ऐसी घटनाओं से बांग्लादेश की छवि को कितना नुकसान पहुंच रहा है। 

सवाल- क्या आपको लगता है कि इन हमलों के पीछे तालिबान का कोई संबंध है?

जवाब- एक पत्रकार के तौर पर बिना तथ्य को जाने मैं इस पर कुछ नहीं कह सकती। हां लेकिन इतना जरूर है कि इसका तालिबान से कोई संबंध नहीं है।  
  
सवाल-आपने पहले कहा कि अल्पसंख्यकों पर होने वाले हमलों में उन्हें न्याय नहीं मिलता, क्या आप प्रधानमंत्री शेख हसीना की उन बातों पर भरोसा करती हैं जिसमें उन्होंने कहा है कि दोषी चाहे जिस भी धर्म के हों, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।

जवाब-भरोसा तो करना होगा। उन्होंने ऐसा कहा है तो विश्वास करना होता है। 

 
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