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सात राज्यों में हिंसक घटनाएं, गडकरी बोले- अंतरराष्ट्रीय कारणों से है किसान संकट

Sun, 03 Jun 2018 02:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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किसान
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किसान आंदोलन में अन्नदाता के तेवरों ने राज्य सरकारों को चिंता में डाल दिया है। सात राज्यों में प्रशासन हिंसक घटनाओं की आशंका और सब्जी, फल, दूध व खाद्य आपूर्ति सुनिश्चत कराने को लेकर अलर्ट पर है। हालांकि केंद्र ने दस दिवसीय हड़ताल को महज कुछ लोगों की साजिश करार दिया है। जबकि आंदोलन के दूसरे दिन राजनीतिक दलों ने इसमें अपनी जगह बनाने की कवायद शुरू कर दी है।
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मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश समेत सात सूबे की सरकारों ने क्षेत्रीय प्रशासनों को अलर्ट रहने के निर्देश जारी किए हैं। उन्हें पिछली बार की तर्ज पर आंदोलन के हिंसक होने और बड़ा रूप अख्तियार करने की आंशका है। हालांकि हड़ताल के दूसरे दिन तक किसानों द्वारा सब्जी, फल और दूध फेंकने के अलावा कोई अनहोनी सामने नहीं आई है। 

कर्जमाफी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने समेत 32 मांगों के समर्थन में हड़ताल को लेकर डेढ़ सौ से ज्यादा किसान संघ एकजुट हैं। अब तक सात राज्यों में ही इसका मिला-जुला असर दिखा है जिनमें महाराष्ट्र, राजस्थान और छत्तीसगढ़ भी शामिल हैं। राज्य प्रशासनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती आम जनता के लिए फल, सब्जी, खाद्य और दूध की आपूर्ति कराना है। फिलहाल मध्य प्रदेश के कुछेक इलाकों को छोड़कर ग्रामीण से शहरी क्षेत्रों में रोजाना होने वाली आपूर्ति में किसी प्रकार की बाधा की सूचना नहीं है।  
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सात राज्यों की शहरी क्षेत्र की मंडियों में सब्जियों, फलों और खाद्य के दाम भी फौरी तेजी सामने आई है। माना जा रहा है कि किसानों के दस दिनों के बंद के पहले दिन आम लोगों की ओर से इन चीजों की अतिरिक्त खरीद की गई है। ऐसे में आपूर्ति की तुलना में मांग बढ़ने से दाम में थोड़ी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। दरअसल किसान संघों ने ने गांवों से शहरों में जाने वाले अनाज और सब्जियों की आपूर्ति रोकने को कहा है। 

यह फिलहाल छुटपुट तौर पर विभिन्न राज्यों सब्जी, फल और दूध फेंकने तक सीमित है। जिसको लेकर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा है कि अगर किसान फल-सब्जी नहीं बेचेंगे तो अपना ही नुकसान करेंगे। उन्होंने हड़ताल का कोई असर नहीं होने का दावा करते हुए कहा है कि यह कोई मुद्दा नहीं है।  

किसान आंदोलन पर केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री कृष्णा राज ने कहा है कि किसान पूरी तरह संतुष्ट है, उनकी आय डेढ़ गुना हो गई है। कुछ लोग साजिश के तहत विरोध कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें भड़काया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर किसानों की छोटी-मोटी समस्याओं को दूर करने की कोशिश सरकार कर रही है। किसानों की आय और उपज लगातार बढ़ रही है। पक्ष से उलट विपक्ष अब इस आंदोलन में अपनी जगह बनाने में जुट गया है। हालांकि किसान संघ पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि यह आंदोलन अन्नदाता का है राजनीतिक नहीं। 

फिर भी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश, मंदसौर में किसान रैली को संबोधित करने को लेकर एक ट्वीट किया है। इसमें उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि कृषि क्षेत्र पर छाए संकट की तरफ केंद्र सरकार का ध्यान ले जाने के लिए किसान भाई दस दिनों का आंदोलन करने के मजबूर है। यूपी, एमपी, हरियाणा और राजस्थान में कुछेक क्षेत्रीय दलों ने भी किसान संघों से संपर्क साधा है, लेकिन अभी तक उन्होंने आंदोलन को लेकर अपनी रणनीति सार्वजनिक नहीं की है।   
 
गौरतलब है कि दस दिनों के आंदोलन में किसानों की प्रमुख मांग कर्ज माफी, एमएसपी मुहैया कराने और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें जल्द से जल्द लागू करने की है। सरकार ने साल 2004 में स्वामीनाथन आयोग का गठन किया था, लेकिन पिछले आठ सालों से इस रिपोर्ट को तव्व्जो नहीं दी है।  
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