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Ayodhya Verdict: सुप्रीम कोर्ट का फैसला गले नहीं उतर रहा है निर्मोही अखाड़े को

Tue, 12 Nov 2019 02:09 AM IST
संजीव कुमार झा राजीव सिन्हा, अमर उजाला

सार

  • सेबियत का अधिकार छीने जाने पर कानूनी विकल्प तलाश रहा है निर्मोही अखाड़ा
  • सुप्रीम कोर्ट का फैसला गले नहीं उतर रहा है निर्मोही अखाड़े को
  • एक-दो दिनों में अखाड़ा फैसला लेगा कि पुनर्विचार याचिका दायर किया जाएगा या नहीं
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अयोध्या फैसला - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले में निर्मोही अखाड़े को उसके अधिकारों से वंचित करना संत-समाज केगले नहीं उतर रहा है। निर्मोही अखाड़ा स्तब्ध है। वह यह समझ नहीं पा रहा है कि आखिर उसके सेबियत के अधिकार को क्यों खारिज कर दिया गया जबकि वर्षों से उस जगह पर पूजा का प्रबंधन उसके हाथ में था।

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निर्मोही अखाड़ा ने अमर उजाला’ को बताया कि हमें इस बात की खुशी है कि 153 वर्षों के बाद अयोध्या में राम मंदिर बनाने का रास्ता साफ हो गया लेकिन यह बात गले नहीं उतर पा रही है कि उसके सेबियत का अधिकार को क्यों नकार दिया गया। अखाड़े के सरपंच 95 वर्षीय महंत राजा रामचंद्र आचार्य के अनुसार, अखाड़ा शुरू से ही राम मंदिर के लिए कानूनी लड़ाई लड़ता आ रहा है लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसके अधिकारों को ही नकार दिया।

अखाड़े केप्रवक्ता कार्तिक चोपड़ा ने कहा कि एक तरफ सुप्रीम कोर्ट यह मान रहा है कि विवादित स्थल पर वर्षों से निर्मोही अखाड़े की मौजूदगी थी वहीं दूसरी तरह उसके सेबियत के अधिकार को छीन लिया गया। न तो सुन्नी वक्फ बोर्ड और न ही रामलला विराजमान ने उसके सेबियत के अधिकार को चुनौती दी थी, बावजूद इसके अखाड़े को उसके इस अधिकार से वंचित कर दिया गया। सुन्नी वक्फ बोर्ड तो यह भी मानता रहा था कि बाहरी अहाते में अखाड़े का कब्जा था।

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चोपड़ा ने बताया कि सुनवाई के दौरान पांच सदस्यीय पीठ ने भी हमें सेबियत के अधिकार पर यह कहते हुए दलीलें पेश करने से रोक दिया था कि सुन्नी वक्फ बोर्ड और रामलला विराजमान उसके इस अधिकार का विरोध नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर तो महत्वपूण ही है राम-काज भी उतना ही महत्वपूर्ण है और राम-काज की जिम्मेदारी निर्मोही अखाड़े के पास थी।

साथ ही अखाड़े को यह बात भी गले नहीं उतर रही है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड और रामलला विराजमान ने उसकेबाद सूट दायर किया था लेकिन लिमिटेशन केआधार पर सिर्फ उसकेसूट को खारिज कर दिया गया, जो हमारी समझ से परे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने विवादित स्थल पर वर्षों से अखाड़े की मौजूदगी और उसकी भूमिका को ही ध्यान में रखते हुए ही अपने विशेषाधिकार(अनुच्छेद-142 के तहत) केंद्र सरकार द्वारा बनाए जाने वाले ट्रस्ट द्वारा स्कीम बनाते वक्त निर्मोही अखाड़े को प्रबंधन में उचित भूमिका प्रदान करने के लिए कहा है। चोपड़ा ने कहा कि अब देखने वाली बात होगी कि सरकार द्वारा उन्हें क्या भूमिका दी जाती है।

चोपड़ा ने बताया कि अखाड़े केवकील फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अध्य्यन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अखाड़े के पास कानूनी विकल्प मौजूद है और जल्द ही इस पर विचार किया जाएगा कि पुनर्विचार याचिका दायर की जाए या नहीं?
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