निर्भया के गुनहगार पवन को नाबालिग साबित करने की हर जुगत लगा रहे वकील एपी सिंह को दिल्ली बार काउंसिल ने नोटिस जारी किया है। पवन की 2012 में वारदात के वक्त नाबालिग होने की याचिका दिल्ली हाईकोर्ट के जज सुरेश कुमार कैत ने खारिज कर दी थी।
उस वक्त कोर्ट ने यह भी ध्यान दिलाया था कि अदालत के बार-बार समन देने के बावजूद एपी सिंह कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए। इस पर कोर्ट ने दिल्ली बार काउंसिल को एपी सिंह के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए और साथ ही उन पर 25 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। बार काउंसिल ने उनसे दो हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है।
विशेषज्ञों की राय: पीड़िता के परिवार वालों की माफी देने या न देने के नजरिए की कानूनी अहमियत नहीं
इंदिरा जयसिंह की माफी देने की सलाह पर बहस छिड़ गई है। कानून के जानकारों का कहना है कि पीड़िता के परिवार वालों की माफी देने या न देने के उनके नजरिए की कोई कानूनी अहमियत नहीं है।
वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी और विकास सिंह ने बताया कि आपराधिक मुकदमे हमेशा सरकार के खिलाफ होते हैं। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विकास सिंह के मुताबिक, पीड़िता के परिवारवालों की राय कोई कानूनी अहमियत नहीं रखती है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि दोषी दया याचिका में इस तरह की राय रखते हैं।