कोरोना संक्रमण के बीच केरल में निपाह वायरस ने केंद्र सरकार के कान खड़े कर दिए हैं। कोझीडोड में 12 वर्षीय लड़के की निपाह वायरस के कारण मौत हो गई है। सोमवार को तमिलनाडु के कोयंबतूर में भी संक्रमण की खबर आई। गनीमत है कि वह खबर गलत निकली।
निपाह वायरस से संक्रमण का मामला अभी केरल में ही सामने आया है। पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में कोई संक्रमित नहीं मिला है। एएनआई ने सोमवार को कोयंबटूर के जिला कंट्रोलर डॉ. जीएस समीरन के हवाले से कोयंबतूर में केस मिलने की खबर दी थी। हालांकि एजेंसी ने बाद में समीरन के हवाले से ही बताया कि कोयंबतूर में कोई केस नहीं मिला है। डॉ. समीरन ने कहा कि निपाह वायरस संक्रमण का मामला केरल के कालीकट में मिला है। सीमावर्ती कोयंबतूर में इससे बचाव के सभी एहतियाती उपाय किए जा रहे हैं।
कोझिकोड में दो और में मिले लक्षण
केरल को कोझिकोड में केंद्रीय टीम ने निपाह वायरस से संक्रमित 12 साल के बच्चे के घर का दौरा कर सैंपल लिए। बताया जा रहा है कि इस लड़के के संपर्क में 188 लोग आए थे। इसमें दो में वायरस के लक्षण मिले हैं।
केंद्रीय मंत्री मुरलीधरन ने की अफसरों से बात
उधर, केंद्रीय मंत्री मुरलीधरन ने कहा कि उन्होंने केरल में निपाह संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों से चर्चा की है। अधिकारियों ने कहा कि वे हालात पर सतत नजर रखे हुए हैं। मुरलीधरन ने कहा कि वे नहीं सोचते कि हालात बेकाबू या चेतावनीजनक हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने की सिफारिशें
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने केरल के मुख्य सचिव वीवी जॉय को पत्र लिखकर कोझिकोड में निपाह वायरस मिलने के बाद उठाए जाने वाले कदमों की सिफारिश की है। भूषण ने बताया कि ये सिफारिशें राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र एनसीडीसी की टीम द्वारा वहां का दौरा करने के बाद पेश रिपोर्ट के आधार पर की गई हैं।
निपाह का नहीं है खास इलाज : डॉ. बिश्वास
एम्स के मेडीसीन विभाग के प्रोफेसर डॉ. आशुतोष बिश्वास ने कहा है कि हमारे पास निपाह का कोई खास इलाज नहीं है। इसकी बीमारी की वजह बनने वाले फ्रूट बैट (चमगादड़) विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में ही होते हैं, यदि वे उड़कर दूसरी जगह जाते हैं, तो निश्चित रूप से यह बीमारी और फैल सकती है।
2018 में 17 की गई थी जान, 2019 में फैला था
19 मई 2018 में भी निपाह का पहला मामला कोझिकोड जिले में ही मिला था। एक जून 2018 तक प्रदेश में इस संक्रमण से 17 की मौत हुईं थीं और 18 मामलों की पुष्टि हुई थी। हालांकि 10 जून को इस संक्रमण के खत्म होने का एलान किया गया था। इसके बाद जून 2019 में कोच्चि में निपाह का एक मामला मिला था। इससे संक्रमित 23 वर्षीय छात्र बाद में स्वस्थ हो गया।
काफी खतरनाक है
विशेषज्ञों के मुताबिक, निपाह वायरस काफी खतरनाक है और इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस वायरस से संक्रमित होने वाले लोगों में 40 से 75 फीसदी तक की मौत हो जाती है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इसका कोई इलाज भी नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने निपाह वायरस को दुनिया के 10 सबसे खतरनाक वायरस की सूची में शामिल किया है।
संक्रामक समय बहुत लंबा है
निपाह वायरस के खतरनाक होने के और भी कई कारण हैं। इसका इंक्यूबेशन पीरियड यानी संक्रामक समय बहुत लंबा होता है। कभी-कभी तो 45 दिन। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति इस वायरस से संक्रमित हो जाता है, तो उसे इस बारे में पता ही नहीं चलता और ऐसे में वह इस वायरस को और भी लोगों में फैला चुका होता है।
ये हैं लक्षण
संक्रमित मरीजों में तेज बुखार, खांसी, थकान, सांस लेने में तकलीफ, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द और एनसेफिलाइटिस जैसे लक्षण दिख सकते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि एनसेफिलाइटिस होने पर दिमाग में सूजन आ जाती है और ऐसे में मरीज की मौत तक हो सकती है। इस बच्चे को भी एनसेफिलाइटिस हुआ जिसकी वजह से उसकी अस्पताल में भर्ती होने के तीसरे दिन मौत हो गई।