राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया है कि एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में आरोपी व्यक्ति बिना किसी पुख्ता आधार के महत्वपूर्ण तथ्यों से छेड़छाड़ कर रहे हैं और मुकदमे में देरी के लिए अदालत को भ्रमित कर रहे हैं। एजेंसी ने अदालत से विशेष अदालत के समक्ष मुकदमे की कार्यवाही पर अंतरिम रोक नहीं लगाने का आग्रह किया है।
इस सप्ताह की शुरुआत में दाखिल किए गए एक हलफनामे में एनआईए ने न्यायाधीश नितिन जामदार और एसवी कोतवाल की पीठ से कहा कि उसे कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा और अन्य आरोपियों के मामले में फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) से इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की प्रतियां अभी नहीं मिली हैं। एफएसएल से मिलने के बाद वह इन्हें पेश करेगी।
एजेंसी ने आरोपियों की ओर से लगाए गए उन आरोपों को भी खारिज किया है जिनमें कहा गया है कि उनके पास से जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई है। एनआईए ने बताया है कि ऐसे सबूतों के पांच हिस्सों की क्लोन प्रतियों की जांच एफएसएल में की जा रही है और वहां से प्राप्त होने के बाद एजेंसी इनकी प्रतियां आरोपियों को उपलब्ध कराएगी।
एनआईए ने हाईकोर्ट से कहा है कि इस मामले में आरोपियों का मूल मकसद मुकदमे की कार्यवाही शुरू होने में देरी करवाना है। एनआईए ने यह हलफनामा सुधा भारद्वाज और गौतम नवलखा की ओर से इस साल अगस्त में दायर की गई याचिकाओं पर दाखिल किया है जिनमें एजेंसी की ओर से जब्त किए गए सभी उपकरणों की क्लोन प्रतियों की मांग की गई थी।
अपने हलफनामे में एनआईए ने कहा कि हम पहले ही इस तरह की कुछ क्लोन प्रतियां प्रदान कर चुके हैं और बाकी को देने में हो रही कुछ देरी किसी भी तरह से आरोपियों के अधिकारियों का उल्लंघन नहीं है। अदालत इस मामले में अगली सुनवाई 22 नवंबर को करेगी।