केंद्र सरकार, स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया यानी सिमी की तरह पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पर प्रतिबंध लगा सकती है। गुरुवार को दर्जनभर राज्यों में एक साथ हुई एनआईए व सहयोगी एजेंसियों की छापेमारी में जो कुछ निकलकर सामने आया है, केंद्रीय गृह मंत्रालय उसकी मदद से इस संगठन को प्रतिबंध के दायरे में ला सकता है। एनआईए द्वारा पीएफआई के खिलाफ ठोस सबूत जुटाए गए हैं। ये मामला इतना गंभीर है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एनआईए के छापों के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और एनआईए चीफ सहित विभिन्न एजेंसियों के अफसरों के साथ बैठक करनी पड़ी।
विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि विभिन्न जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय गृह मंत्रालय पीएफआई पर बैन लगाने की पूरी तैयारी कर चुका है। जांच एजेंसियों के सबूतों को लेकर कानूनी जानकारों से सलाह ली जा रही है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि बाद में जब पीएफआई के पदाधिकारी अदालत का दरवाजा खटखटाएं, तो उन्हें सरकार के किसी कमजोर बिंदु के आधार पर कोई राहत न मिल जाए। केंद्र सरकार को 2008 में विशेष न्याय अधिकार के आधार पर सिमी पर लगाया प्रतिबंध हटाना पड़ा था। हालांकि कुछ समय बाद सर्वोच्च अदालत के जरिए उक्त संगठन दोबारा से प्रतिबंध के दायरे में आ गया था।
सिमी भी इसी तरह का संगठन था। शुरू में इसके द्वारा भी वही दावा किया गया, जो आज पीएफआई कर रहा है। यानी खुद को सामाजिक संगठन बता रहा था। सिमी की स्थापना अप्रैल 1977 में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुई थी। बाद में सामने आया कि इस संगठन का मकसद भारत को एक इस्लामिक राज्य में परिवर्तित करना था। संगठन के पदाधिकारी कहते थे कि अभी भारत की आजादी बाकी है। जब इस संगठन की तोड़फोड़ वाली गतिविधियां बढ़ने लगीं, तो 2001 में पहली बार सिमी को गैरकानूनी संगठन घोषित कर दिया गया। उसके बाद कई दफा यह संगठन प्रतिबंधित हुआ है। फरवरी 2014 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने इस संगठन पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था।
उस वक्त जांच एजेंसियों के हवाले से कहा गया कि सिमी अपना विस्तार आतंकी संगठनों तक कर रहा है। बड़े आतंकी संगठन, सिमी से जुड़ने लगे थे। जांच में सिमी को आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन के बहुत करीब बताया गया। केरल सरकार ने साल 2012 में पीएफआई को सिमी का ही दूसरा रूप कहा था। ये अलग बात है कि उसके बाद पीएफआई की सबसे ज्यादा गतिविधियां केरल में ही देखने को मिली। केरल हाईकोर्ट ने अपनी एक टिप्पणी में इस संगठन को आतंकी समूह बता दिया था। झारखंड सरकार ने भी पीएफआई को प्रतिबंधित किया था। बाद में झारखंड हाईकोर्ट ने प्रतिबंध हटाने के आदेश दिए थे। संथाल परगना में अवैध खनन में पीएफआई का नाम सामने आया। 2018 में प्रवर्तन निदेशालय ने पीएफआई और एसडीपीआई के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। अभी भी मनी लॉड़्रिंग केस की जांच चल रही है। पहले भी पीएफआई पर बैन लगाने की कोशिश हुई, लेकिन ठोस साक्ष्यों के अभाव में कदम पीछे खींच लिया गया। इस बार पीएफआई के ख़िलाफ जांच एजेंसियों द्वारा ठोस सबूत होने का दावा किया जा रहा है।