केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को धमकी भरे फोन कॉल करने के मामले की जांच अभी भी जारी है। वहीं राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने इस केस की कार्यवाही को मुंबई की विशेष एनआईए अदालत में स्थानांतरित करने की मांग करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ का रुख किया है। इससे पहले जिला एवं अतिरिक्त सत्र (एनआईए) न्यायाधीश जेपी जपाटे ने 18 जुलाई को फैसला सुनाया था कि संघीय एजेंसी मामले की जांच अपने हाथ में ले लेगी, लेकिन कार्यवाही नागपुर एनआईए अदालत में जारी रहेगी।
एनआईए ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत नागपुर में धंतोली पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर मुंबई में दो प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कीं। इसके बाद, एजेंसी ने यहां विशेष अदालत के समक्ष एक आवेदन दायर किया, जिसमें यूएपीए मामलों को मुंबई की विशेष एनआईए अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की गई।
सूत्रों ने पहले कहा था कि गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर एनआईए को मामले की जांच अपने हाथ में लेने का निर्देश दिया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय से हरी झंडी मिलने के बाद केंद्रीय एजेंसी ने मामले में आतंकी एंगल की जांच शुरू की।
बता दें कि अफसर पाशा और जयेश पुजारी उर्फ कांथा ने इस साल 14 जनवरी को नागपुर में गडकरी के जनसंपर्क कार्यालय को धमकी भरा फोन किया था। जिसमें 100 करोड़ रुपये की मांग की गई थी और दाऊद इब्राहिम गिरोह का सदस्य होने का दावा किया गया था।
पुलिस ने इस मामले की जानकारी देते हुए कहा था कि उस समय पुजारी पड़ोसी राज्य कर्नाटक की एक जेल में बंद था। उसने 21 मार्च को एक और फोन किया और धमकी दी कि अगर 10 करोड़ रुपये नहीं दिए गए तो वह नागपुर से भाजपा के लोकसभा सांसद को गडकरी नुकसान पहुंचाएगा। पुजारी को 28 मार्च को बेलगावी की एक जेल से गिरफ्तार कर नागपुर लाया गया और उसके खिलाफ सख्त गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया था।