एनआईए प्रवक्ता ने कहा कि धीरज सीपीआई (माओवादी) के बैनर तले एक सशस्त्र दस्ते के लिए काम करते थे। इतना ही नहीं, वे उस गैरकानूनी संगठन के लिए धन जुटाने का भी काम करते थे। इस धन का इस्तेमाल गैरकानूनी और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के लिए किया जाना था।
बिहार में नक्सली हथियार बरामदगी मामले में एनआईए ने दो आरोपियों के खिलाफ विशेष कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। एनआईए के एक अधिकारी ने मंगलवार को इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्रीय जांच एजेंसी ने जिन दो आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है उनके नाम कौरिया (बंजरिया) के राम बाबू राम उर्फ 'राजन' और तरियानी छपरा (डोरा टोला) के रहने वाले राम बाबू पासवान उर्फ 'धीरज' उर्फ 'प्रशांत' हैं।
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एनाईए के अधिकारी ने बताया कि इन दोनों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। मामले में की गई जांच में पता चला है कि दोनों आरोपी प्रतिबंधित आतंकवादी समूह सीपीआई (माओवादी) के सशस्त्र कैडर थे। वे सक्रिय रूप से प्रतिबंधित संगठन के लिए काम भी कर रहे थे इतना ही नहीं, संगठन के निर्देशों पर वे अभियान भी चला रहे थे।
एनआईए प्रवक्ता ने कहा कि धीरज सीपीआई (माओवादी) के बैनर तले एक सशस्त्र दस्ते के लिए काम करते थे। इतना ही नहीं, वे उस गैरकानूनी संगठन के लिए धन जुटाने का भी काम करते थे। इस धन का इस्तेमाल गैरकानूनी और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के लिए किया जाना था।
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इसके अलावा, दोनों गांववालों को सीपीआई(माओवादी) में शामिल होने के लिए भी बहलाते थे। जांच में पता चला है कि उनका उद्देश्य संगठन की ताकत बढ़ाना और उसका विस्तार करने के साथ ही उसकी विचारधारा का प्रचार करना था।
बता दें कि बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के बरियाकला गांव के पास एक जंगली इलाके में कई हथियार दबे मिले थे। इनमें दो एके-47 राइफल, पांच मैगजीन और 7.62x39 मिमी जीवित गोला-बारूद के 460 राउंड शामिल थे। इसके साथ ही बड़ी मात्रा मे कैश भी जब्त किया गया था। शुरुआत में मामले की जांच बिहार पुलिस ने शुरू की थी। हालांकि बाद में एनआईए ने 23 जून को बिहार पुलिस से मामला अपने हाथ में ले लिया था।