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पाकिस्तान समर्थित साजिश पर वार: NIA कोर्ट का फैसला, लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े मामले में आरोपी को 10 साल की सजा

Thu, 22 Jan 2026 03:32 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

कोलकाता की विशेष एनआईए अदालत ने पश्चिम बंगाल में युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर लश्कर-ए-तैयबा में भर्ती करने की साजिश में सैयद एम. इदरीस को दोषी ठहराया। कोर्ट ने उसे 10 साल की कठोर कैद और 70 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

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एनआईए - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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कोलकाता की विशेष एनआईए अदालत ने पाकिस्तान समर्थित साजिश से जुड़े एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। इस साजिश का मकसद पश्चिम बंगाल में मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के लिए भर्ती करना था। अदालत ने कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के रहने वाले सैयद एम. इदरीस को इस मामले में दोषी ठहराया है। बुधवार को सुनाए गए फैसले में कोर्ट ने उसे 10 साल की कठोर कारावास की सजा दी है। इसके साथ ही आरोपी पर 70,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

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एनआईए अधिकारियों के अनुसार, इदरीस को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यूएपीए की कई धाराओं के तहत दोषी पाया गया। बता दें कि यह मामला सबसे पहले पश्चिम बंगाल पुलिस ने दर्ज किया था। बाद में अप्रैल 2020 में इसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अपने हाथ में ले ली। एनआईए ने जांच के दौरान सैयद एम. इदरीस को एक अन्य व्यक्ति के साथ गिरफ्तार किया था।

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इससे पहले एक महिला की हुई थी गिरफ्तारी
इससे पहले, मार्च 2020 में पश्चिम बंगाल पुलिस ने उत्तर 24 परगना जिले के बशीरहाट (बडूरिया) इलाके से तानिया परवीन नाम की एक महिला को गिरफ्तार किया था। वह भी इस लश्कर-ए-तैयबा नेटवर्क से जुड़ी बताई गई थी। उसके पास से ऐसे भड़काऊ साहित्य और पर्चे बरामद हुए थे, जिनमें मुस्लिम युवाओं को भारत के खिलाफ ‘जिहाद’ के लिए उकसाया जा रहा था।
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अन्य आरोपियों पर मुकदमा जारी
इतना ही नहीं मामले में एनआईए अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में शामिल अन्य आरोपियों के खिलाफ अभी भी मुकदमा चल रहा है। जांच एजेंसी का कहना है कि यह एक संगठित साजिश थी, जिसका मकसद देश की सुरक्षा और शांति को नुकसान पहुंचाना था। एनआईए ने अदालत के फैसले को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

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