राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मिजोरम में विस्फोटक, हथियार और गोला-बारूद जब्ती मामले में 10 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। एजेंसी ने आरोपियों पर भारत-म्यांमार सीमा पर चल रहे हथियारों, गोला-बारूद और विस्फोटकों की तस्करी के नेटवर्क में संलिप्त होने का आरोप लगाया है।
मामला एक मई 2022 को द्वितीय बटालियन एआर की असम राइफल्स नाका टीम द्वारा मिजोरम के आइजोल के कुलिकावन थाने से विस्फोटकों और आग्नेयास्त्रों से लदे दो पिकअप ट्रकों की जब्ती से संबंधित है। इस खेप में 200 छड़ों के 223 बक्से, बारूद, हथियार शामिल थे। इस दौरान वाहनों में सवार चार लोगों को हिरासत में लिया गया था। इसके बाद अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
एनआईए ने विशेष एनआईए अदालत में दायर किए आरोप पत्र में लालरिंतलुआंगा, लालदिनपुइया, ज़ोरेमसंगा, लालबियाक्तलुआंगा,
लालरिनसांगा, ज़ोथनमाविया, हेनरी सियानगुना, जे रोहलुपुइया, लालदिनपुइया और डेविड लालरामसांगा को आरोपियों बनाया है। इनमें म्यांमार के कुछ भगोड़े भी शामिल हैं।
एनआईए ने कहा कि जांच में म्यांमार के विद्रोही अपने देश के साथ-साथ मिजोरम में अपने सहयोगियों के साथ मिलकर म्यांमार में मौजूदा शासन के खिलाफ लड़ रहे मिलिशिया समूहों के सशस्त्र संघर्ष का समर्थन करने के लिए हथियार खरीद रहे थे। यह साजिश म्यांमार के नागरिक
लालरिनसांगा ने रची थी।
लालरिनसांगा ने लाइसेंस प्राप्त विस्फोटक डीलर डेविड लालरामसांगा और सी लालडिनसागा के साथ अपने सहयोगियों लालबियाट्लुआंगा और ज़ोथनमाविया के साथ सांठगांठ की थी और बड़ी मात्रा में विस्फोटक खरीदे।
जांच में सामने आया कि अन्य आरोपी भी म्यांमार के विद्रोहियों को अवैध हथियार और गोला-बारूद की आपूर्ति में सीधे तौर पर शामिल थे। जब्त किए गए हथियारों, विस्फोटकों के बैच नंबर और क्यूआर कोड से पता चला कि खेप की आपूर्ति गुवाहाटी स्थित विस्फोटक फर्म अल्बरीन एक्सप्लोटेक ने की थी।
एनआईए के मुताबिक, तस्करी का यह नेटवर्क गुजरात, राजस्थान, कश्मीर समेत पूरे उत्तर-पूर्व के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय है। जांच में पता चला है कि यह नेटवर्क अपराधियों के साथ आतंकी और अलगाववादी ताकतों के लिए काम करता है और उन्हें अब तक हथियार और गोला बारूद की बड़ी खेप मुहैया कराता रहा है। यही नहीं, अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर सक्रिय देश विरोधी तत्व भी इस नेटवर्क से हथियार लेते रहे हैं।