Arun Mishra: एनएचआरसी प्रमुख ने कहा, आंकड़ों के आधार पर मुझे नहीं लगता कि भारत में मानवाधिकार के उल्लंघन की शिकायतों में वृद्धि हुई है। मणिपुर की घटना को पूरे भारत में मानवाधिकार की स्थिति के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) एशिया प्रशांत क्षेत्र के राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थानों का दिल्ली में 20-21 सितंबर को द्विवार्षिक सम्मेलन आयोजित कर रहा है। इस सम्मेलन को लेकर एनएचआरसी प्रमुख जस्टिस अरुण कुमार मिश्रा ने कहा कि इसमें लगभग 31 देश भाग लेने जा रहे हैं। उनमें से पांच या छह देश पर्यवेक्षक के रूप में हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारे पास चर्चा के लिए तीन सत्र हैं।
विज्ञापन
'कुछ विदेशी एजेंसियां उठा रहीं सवाल'
भारत में मानवाधिकारों के उल्लंघन के सवाल पर उन्होंने कहा कि अगर हम अपने रिकॉर्ड को देखें और बीते तीन दशकों में जो घटनाएं हुई हैं, आंकड़ों के आधार पर मुझे नहीं लगता कि भारत में मानवाधिकार के उल्लंघन की शिकायतों में वृद्धि हुई है। मणिपुर की घटना को पूरे भारत में मानवाधिकार की स्थिति के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। हर देश में उल्लंघन की घटनाएं हैं, जो आम बात है। उन्होंने कहा, कुछ विदेशी एजेंसियां भारत में मानवाधिकारों के उल्लंघन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठा रही हैं।
'मणिपुर की घटना एक जातीय हिंसा'
एनएचआरसी प्रमुख जस्टिस मिश्रा ने आगे कहा, 'मणिपुर का मामला अलग है। वहां ऐसी घटना जातीय हिंसा में हुई है। केवल मणिपुर की घटना को आधार बनाकर सही स्थिति बयां नहीं की जा सकती। मुझे नहीं लगता कि वर्तमान में भारत में मानवाधिकारों का कोई घोर उल्लंघन हो रहा है।'