भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने बुधवार को मंत्रालय में काम करने वाले लगभग आधा दर्जन कर्मचारियों के कंप्यूटरों को सीज कर दिया है। जिसकी वजह से कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। इस ऑपरेशन को इस वजह से अंजाम दिया गया क्योंकि परियोजनाओं और नीतियों से जुड़े संवेदनशील दस्तावेजों और सूचनाओं को राजमार्ग बिल्डर्स और कांट्रैक्टर्स को पास कर दिया था। ऐसा तब किया गया जबकि उसपर फैसला होना बाकी था।
एनएचआई ने इतिहास में ऐसा पहली बार किया था और इसी वजह से यह कर्मचारियों के लिए किसी हैरानी से कम नहीं था। एनएचएआई के सदस्य (प्रशासन) आरके चतुर्वेदी ने कहा, 'यह लोगों को किसी भी तरह के कदाचार में शामिल होने से रोकने के लिए किया गया था। ऐसी शिकायते थीं कि निजी बिल्डरों को उन फाइलों की सूचना मिल रही है जो प्रक्रियाधीन हैं।' उन्होंने आगे कहा कि एनएचएआई आईटी की नीति के अनुसार कंप्यूटरों को स्कैन किया जा रहा है और इस तरह के अभ्यासों को तीन या चार महीने में एक बार किया जा सकता है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार सीज किए गए कंप्यूटरों को देर शाम तक चेक किया गया और कुछ सिस्टम को भी उठाया गया है। बुधवार को जब्त किए गए अधिकांश कंप्यूटर मुख्य महाप्रबंधकों के निजी सचिवों से जुड़े थे। अधिकारी और राजमार्ग कांट्रैक्टर ने इस बात को स्वीकार किया है कि उन्हें परियोजनाओं से जुड़ी सूचना और दस्तावेज एनएचएआई से आसानी से मिल जाते हैं। इसकी वजह कांट्रैक्टर का कर्मचारियों और वरिष्ठ अधिकारियों के नुमाइंदों तक होने वाली निजी और आसान पहुंच है।
एनएचएआई के दूसरे अधिकारी ने कहा, 'इसमें कुछ गलत नहीं है। चूंकि यह एक लागू करने वाली संस्था है आपको निजी कांट्रैक्टर के साथ जुड़ना पड़ता है। उन्हें प्रजेंटेशन के लिए बुलाना पड़ता है और उनके विचारों को जानना पड़ता है। लेकिन अगर कोई इसका दुरुपयोग कर रहा है तो सिस्टम को साफ रखने के लिए जांच और संतुलन का होना भी आवश्यक है।' एनएचएआई देश की प्रमुख राजमार्ग निर्माण एजेंसी है। यह हर साल लगभग एक लाख करोड़ रुपये की हजारों परियोजनाओं को लागू करती है। एनएचएआई में विभिन्न स्तरों पर मध्यस्थता के मामलों की एक बड़ी संख्या लंबित है।