राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने एक संयुक्त पैनल बनाया है, जो मध्य प्रदेश के सिंगरौली और उत्तर प्रदेश के सोनभद्र क्षेत्रों में विभिन्न थर्मल पावर स्टेशनों से फ्लाई ऐश के परिवहन से होने वाले वायु प्रदूषण पर एक तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करेगी। फ्लाई ऐश, कोयला पर आधारित बिजली स्टेशनों का उप-उत्पाद है।
एनजीटी एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दावा किया या था कि फ्लाइ ऐश के ट्रांसपोर्टेशन की निगरानी और पर्यवेक्षण के जिम्मेदार अधिकारी कानून के प्रावधानों और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के दिशानिर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल की पीठ ने एक संयुक्त पैनल का गठन किया, जिसमें पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, सीपीसीबी और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल हैं। ग्रीन पैनल ने कहा, रिपोर्ट में सिंगरौली और सोनभद्र कार्य योजना के अनुसार फ्लाई ऐश के ट्रांसपोर्टेशन से जुड़े प्रावधानों के अनुपालन पर प्रकाश डाला जाएगा, ताकि गंभीर रूप से प्रदूषित इस क्षेत्र की पर्यावरणीय गुणवत्ता को बनाए रखा जा सके।