राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने पर्यावरण की दृष्टि से आगरा जिले के संवेदनशील क्षेत्र में अवैध रूप से पेड़ काटने और अतिक्रमण के आरोपों को लेकर केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। यह मामला खास तौर पर ताजमहल के आसपास और आगरा-ग्वालियर राजमार्ग के क्षेत्र से जुड़ा है।
एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ इस क्षेत्र में हरित इलाके के नष्ट होने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आगरा विकास प्राधिकरण ताजमहल और आगरा किले के बीच स्थित सौ साल से भी पुराने शाहजहां पार्क में पक्के रास्ते और ईंट-सीमेंट की संरचनाएं बना रहा है।
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23 दिसंबर के आदेश में पीठ ने कहा कि निर्माण कार्य के दौरान सौ साल पुराने पेड़ों की जड़ों के पास गड्ढे खोदे गए, हरित क्षेत्र को नुकसान पहुंचाया गया और पक्षियों व तितलियों के आवास पर असर पड़ा है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि आगरा नगर निगम ग्वालियर रोड पर मधु नगर के आगे हरित पट्टी में अवैध रूप से कंक्रीट का सेल्फी प्वाइंट बना रहा है। याचिका के अनुसार, कई निजी लोगों ने राजमार्ग के दोनों ओर अनिवार्य हरित पट्टी में पेड़ काटकर वहां इमारतें खड़ी कर दी हैं।
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एनजीटी ने प्रतिवादियों को जारी किया नोटिस
एनजीटी ने कहा कि यह याचिका पर्यावरण नियमों के पालन से जुड़े गंभीर मुद्दे उठाती है और सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया जाता है। इस मामले में प्रतिवादियों में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, उत्तर प्रदेश सरकार, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, आगरा के जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त और जिला वन अधिकारी, ताज ट्रेपेजियम जोन प्राधिकरण और आगरा विकास प्राधिकरण शामिल हैं। मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च को तय की गई है।