राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने तेलंगाना स्थित सरकारी कंपनी सिंगरेनी कोलरीज कंपनी लिमिटेड पर 41.21 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। एनजीटी ने यह कार्रवाई पर्यावरण मंजूरी की शर्तों का उल्लंघन करने और तय सीमा से अधिक खनन के मामले में की है।
जस्टिस के रामकृष्णन और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. सत्यगोपाल कोरलापति ने खनन विभाग को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मद्देनजर अतिरिक्त खनन पर जुर्माना राशि का आकलन करने का निर्देश दिया है। एनजीटी ने यह आदेश तेलंगाना के सत्तुपल्ली गांव निवासी बी. नंदू नायक की याचिका पर दिया।
पीठ ने कहा कि सिंगरेनी कोलरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) को तीन महीने के अंदर तेलंगाना राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को 41.21 करोड़ रुपये का जुर्माना देने का निर्देश दिया जाता है। अगर तय अवधि में जुर्माने की राशि का भुगतान नहीं किया जाता है तो राज्य प्रदूषण बोर्ड को निर्देश दिया जाता है कि वह जिला अधिकारी से वसूली की प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध करे।
एनजीटी ने तेलंगाना राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को उन लोगों की पहचान करने को कहा है जिनके मकानों को शुरुआत में खनन के लिए किए गए धमाकों से नुकसान हुआ है। पीठ ने कहा कि पर्यावरण हर्जाने के रूप में मिली राशि का इस्तेमाल कोयला खदान के आसपास रहने वाले लोगों के हितों की रक्षा करने और कल्याणकारी योजना तैयार करने में किया जाएगा। ये वे लोग हैं जो परियोजना की गतिविधियों से प्रभावित हुए हैं। हर्जाने की राशि का एक हिस्सा आदिवासी बस्तियों के कल्याण में इस्तेमाल किया जाएगा।