बस से टक्कर के बाद चाय की दुकान पर पलट गया टैंकर
ओडिशा के गंजाम में गुरुवार सुबह बस से टक्कर के बाद एक टैंकर सड़क किनारे बनी चाय की दुकान पर पलट गया। हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई और 12 लोग घायल हो गए। पुलिस ने बताया कि समर झोला में राष्ट्रीय राजमार्ग 59 पर भवानी पटना से बेरहामपुर जा रही बस की अस्का की ओर से जा रहे टैंकर से भिड़ंत हो गई। इसके बाद टैंकर चाय की दुकान पर पलट गया। हादसे में बस में सवार एक युवक और चाय की दुकान पर बैठे तीन लोगों की मौत हो गई। घायल 13 लोगों को एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसमें दो लोगों की हालत गंभीर है। इसमें एक युवक ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। एसपी जगमोहन मीना ने बताया कि अब तक चार लोगों की मौत हुई है। मृतकों की पहचान नहीं हुई है। पुलिस टीम और अग्निशमन कर्मी राजमार्ग पर यातयात दुरुस्त करने के लिए प्रयास कर रहे हैं।
आंध्र प्रदेश में बीड़ी जलाने के बाद फेंकी माचिस की तीली, लगी आग
आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में एक बीड़ी जलाने के बाद फेंकी माचिस की तीली से दुकानों और बाइक में आग लग गई। सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक अनंतपुर के कल्याण दुर्गम कस्बे में एक बाइक की टंकी से लीक हुआ पेट्रोल सड़क पर फैल गया था। इस पर कई वाहन खड़े थे। वाहनों के पास खड़े एक युवक ने बीड़ी जलाने के बाद माचिस की तीली सड़क पर फेंकी। इससे सड़क पर फैले पेट्रोल में आग लग गई। आग में बाइक और आसपास की दुकानें चपेट में आ गईं। लोगों ने आग बुझाने की कोशिश की।
गोवा में पुल पर गड्ढे भर रहे मजदूरों को कार ने मारी टक्कर, एक की मौत
गोवा के पुराने मंडोवी पुल के गड्ढे भर रहे मजदूरों को एक कार ने टक्कर मार दी। इसमें 25 साल के एक मजदूर की मौत हो गई। जबकि दो अन्य लोग घायल हो गए। पणजी के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि मृतक की पहचान अमित यादव के तौर पर हुई है। जबकि गंभीर रूप से घायल लोगों को गोवा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तीन मजदूर कार और गड्ढे भरने वाली जेट पैचर मशीन के बीच कुचल गए। कार चालक को गिरफ्तार कर लिया गया है।
विधायकों ने की कुकी जो समुदाय के लिए पृथक प्रशासन की मांग
मणिपुर के दस कुकी जो विधायकों ने इस पूर्वोत्तर राज्य में जातीय हिंसा की जांच कर रहे न्यायिक आयोग से मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह की कथित ऑडियो क्लिप के मद्देनजर अपनी जांच शीघ्र पूरा करने की अपील की है। यह न्यायिक आयोग पिछले साल गुवाहाटी उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अजय लांबा की अध्यक्षता में गठित किया गया था।
मणिपुर सरकार ने कहा है कि इस ऑडियो क्लिप में मुख्यमंत्री की आवाज होने का जो दावा किया जा रहा है, वह झूठा है तथा इसे जातीय हिंसा से प्रभावित इस राज्य में शांति प्रक्रिया पहलों को पटरी से उतारने की कोशिश के तहत सोशल मीडिया पर जारी किया गया है। पुलिस इस कथित वीडियो क्लिप के स्रोत का पता लगाने में जुटी है। इस वीडियो क्लिप में राज्य की जातीय हिंसा पर कुछ टिप्पणियां की गयी हैं।
इन कुकी जो विधायकों ने एक बयान में कहा, ‘‘हम मांग करते हैं कि आयोग अपनी प्रक्रिया में तेजी लाए और अगर एन. बीरेन सिंह का अपराध स्थापित हो जाता है तो उनके खिलाफ उनके ‘अपराधों’ के लिए मुकदमा चलाया जाए। उन्हें तत्काल मुख्यमंत्री पद से भी हटाया जाना चाहिए ताकि उन्हें उनके खिलाफ जांच के नतीजों को प्रभावित करने से रोका जा सके।’’ इन विधायकों ने यह भी दावा किया कि, ‘‘न्यायिक आयोग को लीक हुए जो टेप सौंपे गये हैं, उनसे कई बयान सुने जा सकते हैं।’’
बॉम्बे हाईकोर्ट को गुरुवार कहा कि लापता बच्चों और महिलाओं का पता लगाना सरकार का कर्तव्य है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस अमित बोरकर की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र सरकार को ऐसे मामलों से निपटने के लिए उठाए गए कदमों पर हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया।
अदालत ने मानव तस्करी रोकने के लिए उठाए गए कदमों पर राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) से भी जवाब मांगा और इसे रोकने के लिए महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग (एमएससीडब्ल्यू) से सुझाव आमंत्रित किए। सांगली निवासी शाहजी जगताप की ओर से दायर जनहित याचिका में राज्य पुलिस को 2019 और 2021 के बीच महाराष्ट्र में लापता हुईं एक लाख से अधिक महिलाओं का पता लगाने का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में लापता महिलाओं और बच्चों के मामलों में राज्य के अधिकारियों द्वारा बरती जा रही निष्क्रियता पर चिंता जताई गई है।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता मंजरी पारसनीस ने कोर्ट को बताया कि जगताप की अपनी बेटी लापता है। वकील ने बताया कि बेटी की तलाश के दौरान उनके मुवक्किल को 14 मार्च, 2023 को लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा दिए गए आंकड़े मिले; जिसके मुताबिक महाराष्ट्र में लापता बच्चों की संख्या बहुत ज्यादा है। मंत्रालय के मुताबिक, 2019, 2020 और 2021 में, लापता बच्चों की संख्या क्रमशः 4,562, 3,356 और 4,129 थी। इसी तरह, इन तीन वर्षों में महाराष्ट्र में 18 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं के लापता होने के एक लाख से अधिक मामले सामने आए।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि बच्चों और महिलाओं के लापता होने के कई कारण हो सकते हैं। पीठ ने कहा, ‘‘लेकिन उनका पता लगाना और उनकी सुरक्षा करना तथा यदि आवश्यक हो तो उन्हें सुरक्षित आश्रय देना राज्य का कर्तव्य है। लापता बच्चों और महिलाओं की इतनी बड़ी संख्या का एक कारण संभवतः मानव तस्करी का खतरा है, जिसके लिए सभी सरकारी विभागों, पुलिस, रेलवे और अन्य विभागों के सभी अधिकारियों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है।’’