ईरान के नए सर्वोच्च नेता के तौर पर मोजतबा खामेनेई के नाम का एलान हो चुका है। वहीं अमेरिका की तरफ से इस पर नाराजगी जताए जाने के बाद भारत में ईरानी राजदूत ने प्रतिक्रिया दी है। मोहम्मद फतहाली ने कहा है कि यह फैसला अमेरिका की इच्छा से नहीं बल्कि ईरानी जनता की इच्छा और देश के संविधान के अनुसार लिया गया है।
ईरान में बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बीच अयातुल्ला सैयद मोजतबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर चुना गया है। वहीं भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने कहा है कि यह फैसला अमेरिका की इच्छा से नहीं बल्कि ईरानी जनता की इच्छा और देश के संविधान के अनुसार लिया गया है। राजदूत फतहाली ने एक इंटरव्यू में बताया कि ईरान के अंदर लोगों के विचार अलग-अलग हो सकते हैं और कई तरह की चुनौतियां भी हो सकती हैं, लेकिन जब भी किसी विदेशी हस्तक्षेप की बात आती है तो पूरा ईरान एकजुट हो जाता है। उन्होंने कहा कि ईरानी जनता हमेशा अपने आंतरिक मामलों में बाहरी दखल का विरोध करती रही है।
अयातुल्लाह सैयद मोजतबा खामेनेई: धार्मिक विद्वान
उन्होंने बताया कि नए सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई एक धार्मिक विद्वान हैं, जिन्हें देश की राजनीति और समाज की गहरी समझ है। उन्होंने लंबे समय तक इस्लामी शिक्षा का अध्ययन और अध्यापन किया है और ईरान की राजनीतिक परिस्थितियों को भी करीब से देखा है। फतहाली के मुताबिक, मोजतबा खामेनेई हमेशा ईरान की इस्लामी क्रांति के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध रहे हैं और आने वाले समय में देश की नीतियों में भी इन सिद्धांतों को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि उनके युवा और क्रांतिकारी सोच के कारण देश के प्रशासन और शासन में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
विज्ञापन
ईरान में कैसे चुना जाता है सर्वोच्च नेता?
ईरान के संविधान के अनुसार, सुप्रीम लीडर का चुनाव असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स द्वारा किया जाता है। यही प्रक्रिया अपनाते हुए इस संस्था ने विचार-विमर्श के बाद मोजतबा खामेनेई को नया नेता चुना। राजदूत ने कहा कि यह फैसला दिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी ईरान की संवैधानिक और कानूनी व्यवस्था सही तरीके से काम कर रही है।
अमेरिका-इस्राइल के हमले में ईरान के शीर्ष नेताओं की मौत
बता दें कि, हाल ही में अमेरिका और इस्राइल के संयुक्त सैन्य हमलों में ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और कई वरिष्ठ नेता मारे गए थे। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अरब देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इस्राइल से जुड़े ठिकानों पर हमले किए। इसके बाद से पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। इस्राइल और अमेरिका की ओर से भी ईरान के ठिकानों पर हमले जारी हैं और संघर्ष लेबनान तक फैल चुका है, जहां हिजबुल्ला और ईरान समर्थित समूहों को निशाना बनाया जा रहा है।