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क्या पश्चिम एशिया में भारत लाएगा शांति?: UAE के पूर्व राजदूत का दावा- अगर पीएम मोदी ईरान-इस्राइल फोन करें तो..

Mon, 09 Mar 2026 09:38 PM IST
Nirmal Kant न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

पश्चिम एशिया की जंग के बीच यूएई के पूर्व राजदूत हसन मिर्जा ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगर ईरान और इस्राइल के नेताओं से बात करें तो उनका एक फोन कॉल ही संघर्ष का समाधान कर सकता है। मिर्जा ने क्या कहा, पढ़िए रिपोर्ट-
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भारत में यूएई के पूर्व राजदूत हसन मिर्जा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
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पश्चिम एशिया में जारी जंग का अब दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर दिखने लगा है। जंग के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हुआ है। जिसके कारण भारत समेत दुनिया के तमाम देशों की उर्जा आपूर्ति की चिंताएं बढ़ने लगी हैं। उधर, खाड़ी देश भी असुरक्षा का सामना कर रेह हैं। इस बीच, भारत में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के पूर्व राजदूत हसन मिर्जा ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगर ईरान और इस्राइल में बैठे अपने समकक्षों से बात करते हैं, तो उनका एक फोन कॉल ही इस मसले का समाधान करवा सकता है। 
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एक टेलीविजन चैनल के साथ बातचीत में राजूदत मिर्जा ने कहा, यूएई नहीं चाहता कि यह जंग लंबी खिंचे और न ही वह अपने क्षेत्र का इस्तेमाल किसी तरह के हमले के लिए होने देगा। उन्होंने कहा, सच कहूं तो मुझे समझ नहीं आता कि हम इसमें क्यों शामिल हों। यूएई के पास इसमें शामिल होने का कोई कारण नहीं है। 

यूएई के पूर्व राजदूत ने पीएम मोदी को लेकर क्या कहा?
पूर्व राजदूत मिर्जा ने कहा कि उनका देश ईरान और इस्राइल दोनों का साझेदार है। यह दोनों के बीच संबंध बहाल करवा सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई के राष्ट्रपति के साथ बाचतीत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, पीएम मोदी का सम्मान न केवल खाड़ी देशों में है, बल्कि पूरे क्षेत्र के आम लोगों के बीच भी है। उन्होंने कहा, पीएम मोदी का ईरान और इस्राइल में अपने समक्षकों को एक फोन कॉल इस समस्या का समाधान कर सकता है। इस मुद्दे को खत्म कर सकता है। सिर्फ एक फोन कॉल। यह भरोसा पीएम मोदी की दोनों नेताओं के साथ मजबूत प्रतिष्ठा पर आधारित है, जो इस वक्त युद्ध लड़ रहे हैं। 
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क्या युद्ध का दायरा लगातार बढ़ रहा है?
ध्यान देने वाली बात यह है कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध को लेकर लगातार बयानबाजी हो रही है। लेकिन अब तक शांति की कोई उम्मीद नहीं दिख रही। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर लगातार हमले कर रहे हैं। साइप्रस में तुर्किये ने अपना एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिया है। जबकि, हिंद महासागर में ईरानी जहाज डूबने के बाद तेहरान के नौसैनिक श्रीलंका और भारत में शरण ले चुके हैं। यह घटनाक्रम बताता है कि युद्ध का दायरा धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है।

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