पुराने संसद भवन का उद्घाटन वर्ष 1927 में ब्रिटिश राजा ने नहीं बल्कि ब्रिटिश उपनिवेशवादियों के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन ने किया था। उस समय राजा की जगह वायसराय के द्वारा हुए इस उद्घाटन का कोई विरोध नहीं हुआ था, जबकि तब कांग्रेस अध्यक्ष मोतीलाल नेहरू पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ इस समारोह में शामिल हुए थे।
विपक्षी दलों के नए संसद भवन उद्घाटन समारोह के खिलाफ मुहिम को भाजपा खासतौर से कांग्रेस की प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ नफरत से जोड़ती है। पार्टी के वरिष्ठ नेता के मुताबिक इस समय प्रधानमंत्री की जगह राष्ट्रपति से उद्घाटन की मांग करने वाली कांग्रेस को सांविधानिक मुखिया वाले तर्क के हिसाब से संसद भवन का उद्घाटन वायसराय की जगह ब्रिटेन के राजा से कराने की मांग करनी चाहिए थी। हालांकि तब न तो कांग्रेस ने इस आशय की मांग की और न ही यह कहा कि वह ब्रिटेन के औपनिवेशिक कब्जे को कायम रखने वाले किसी कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेगी।
मोदी से नफरत का बहाना
भाजपा और मोदी सरकार कांग्रेस की अगुवाई में उद्घाटन समारोह को खासतौर से कांग्रेस की प्रधानमंत्री मोदी के साथ दशकों पुरानी नफरत से जोड़ कर देखती है। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस भारत को गांधी परिवार की संपत्ति के रूप में देखती है। मोदी से नफरत और इसी मानसिकता के कारण कांग्रेस ने साल 2017 में जीएसटी लाने के लिए आधी रात को बुलाए गए संसद के सत्र का बहिष्कार किया। वह भी तब जब इस दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और पीएम मोदी दोनों मौजूद थे। इसी मानसिकता के कारण कांग्रेस ने मुखर्जी को भारत रत्न दिए जाने संबंधी कार्यक्रम का भी बहिष्कार किया।
राज्यपालों की हकमारी की चिंता क्यों नहीं?
पार्टी का तर्क है कि इससे पहले भी संसद भवन की एनेक्सी बनी, पुस्तकालय का निर्माण हुआ। कई राज्यों में नई विधानसभा बनी। कांग्रेस के तर्क के आधार पर ऐसे सभी कार्यक्रमों का उद्घाटन और शिलान्यास राष्ट्रपति या राज्यपाल के हाथों होना चाहिए था। मगर सोनिया गांधी ने छत्तीसगढ़ और मणिपुर विधानसभा भवन का उद्घाटन किया। एनेक्सी और पुस्तकाल के उद्घाटन-शिलान्यास समारोह से राष्ट्रपति को दूर रखा गया।
हवन, सर्वधर्म प्रार्थना के साथ होगा संसद भवन का उद्घाटन
नए संसद भवन के उद्घाटनसमारोह की शुरुआत 28 मई रविवार को सुबह हवन और सर्वधर्म प्रार्थना के साथ होगी। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा कक्ष में औपचारिक उद्घाटन करेंगे। विश्वसनीय सूत्रों ने बताया कि सुबह करीब 7.30 बजे नए संसद भवन के परिसर में पूजा और हवन होगी। यह कार्यक्रम करीब 9.0 बजे तक चलेगा। पूजा और हवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश और कुछ शीर्ष अधिकारी मौजूद रहेंगे। शैव संप्रदाय के महंत राजदंड सेंगोल पीएम मोदी को सौंपेंगे। 9 बजे के बाद लोकसभा के अंदर लोकसभा अध्यक्ष के आसन के पास सेंगोल को स्थापित किया जाएगा। इसमें तमिलनाडु के मठ के 20 स्वामी शामिल होंगे। इसके बाद सर्वधर्म प्रार्थना सभा होगी। इसमें शंकराचार्य सहित कई बड़े विद्वान पंडित और साधु संत रहेंगे। सभी धर्मों के गुरु इसमें हिस्सा लेंगे।