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New Criminal Law: जब्त माल से नहीं होगी छेड़छाड़; ड्रग्स की जगह घास, शराब के स्थान पर शरबत रखना नहीं होगा संभव

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 09 Dec 2024 02:20 PM IST

सार

चंड़ीगढ़ पुलिस के डीजीपी एसएस यादव ने बताया, नए कानूनों के तहत पहली जुलाई से लेकर अभी तक 1179 एफआईआर दर्ज की गई हैं। इतना ही नहीं, 245 मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, जबकि 4 केसों में दोषसिद्धि भी हो गई है।
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Chandigarh Police - फोटो : Amar Ujala

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 3 दिसंबर को चंडीगढ़ स्थित पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) में आयोजित समारोह में तीन नए कानूनों की समीक्षा की थी। उन्होंने तीन परिवर्तनकारी, नए आपराधिक कानूनों- 'भारतीय न्याय संहिता', 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' और 'भारतीय साक्ष्य अधिनियम' का सफल कार्यान्वयन, राष्ट्र को समर्पित किया था। चंडीगढ़ प्रशासन ने तीन नए कानूनों को सफलतापूर्वक लागू किया है। तीन नए कानूनों के प्रावधानों के तहत, अब पुलिस थानों या घटना स्थल पर सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं हो सकेगी। थानों में जब्त माल, जैसे 'ड्रग्स' के स्थान पर 'घास का चूरा' या शराब की जगह कोई दूसरा पदार्थ, नहीं रखा जा सकेगा। जितना माल जब्त हुआ है, उसकी तय मात्रा या संख्या को कम दिखाना, आदि, ये सब काम भी अब बंद हो जाएंगे। 

वजह, क्राइम सीन या जब्ती वाले स्थान से लेकर थाने के मालखाने और वहां से फोरेंसिक लैब तक, हर गतिविधि का वीडियो बनेगा। जिम्मेदार लोगों के पास इसका एक्सेस रहेगा। कोई चाह कर भी जब्त माल के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकेगा। जब्त किए गए माल पर क्यूआर कोड लगेगा। थाने में माल जमा कराने वाले का नाम और बेल्ट नंबर, सब कुछ डिजिटल तरीके से नोट होगा। इस जानकारी का भी मिलाना होगा। घटना स्थल से लेकर थाने में माल जमा करने तक, उक्त सभी गतिविधियां, न्याय सेतु एप के माध्यम से थाने में बैठकर देखी जा सकती हैं।

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Chandigarh Police - फोटो : Amar Ujala
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 3 दिसंबर को चंडीगढ़ स्थित पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) में आयोजित समारोह में तीन नए कानूनों की समीक्षा की थी। उन्होंने तीन परिवर्तनकारी, नए आपराधिक कानूनों- 'भारतीय न्याय संहिता', 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' और 'भारतीय साक्ष्य अधिनियम' का सफल कार्यान्वयन, राष्ट्र को समर्पित किया था। चंडीगढ़ प्रशासन ने तीन नए कानूनों को सफलतापूर्वक लागू किया है। तीन नए कानूनों के प्रावधानों के तहत, अब पुलिस थानों या घटना स्थल पर सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं हो सकेगी। थानों में जब्त माल, जैसे 'ड्रग्स' के स्थान पर 'घास का चूरा' या शराब की जगह कोई दूसरा पदार्थ, नहीं रखा जा सकेगा। जितना माल जब्त हुआ है, उसकी तय मात्रा या संख्या को कम दिखाना, आदि, ये सब काम भी अब बंद हो जाएंगे। 

वजह, क्राइम सीन या जब्ती वाले स्थान से लेकर थाने के मालखाने और वहां से फोरेंसिक लैब तक, हर गतिविधि का वीडियो बनेगा। जिम्मेदार लोगों के पास इसका एक्सेस रहेगा। कोई चाह कर भी जब्त माल के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकेगा। जब्त किए गए माल पर क्यूआर कोड लगेगा। थाने में माल जमा कराने वाले का नाम और बेल्ट नंबर, सब कुछ डिजिटल तरीके से नोट होगा। इस जानकारी का भी मिलाना होगा। घटना स्थल से लेकर थाने में माल जमा करने तक, उक्त सभी गतिविधियां, न्याय सेतु एप के माध्यम से थाने में बैठकर देखी जा सकती हैं।

Chandigarh Police - फोटो : Amar Ujala
चंड़ीगढ़ पुलिस के डीजीपी एसएस यादव ने बताया, नए कानूनों के तहत पहली जुलाई से लेकर अभी तक 1179 एफआईआर दर्ज की गई हैं। इतना ही नहीं, 245 मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, जबकि 4 केसों में दोषसिद्धि भी हो गई है। पहले इस बात की आशंका बनी रहती थी या आरोप लगते थे कि सबूतों के साथ छेड़छाड़ हुई है। अब उन सभी संभावनाओं का अंत हो गया है। घटना स्थल पर जो माल जब्त होगा, उसकी वीडियोग्राफी होगी। कितने बजे, वह माल थाने के मालखाने में लाया गया है, जमा कराने वाला कौन है, ये सब जानकारी डिजिटल तरीके से अंकित रहेगी। जब्त माल पर क्यूआर कोड लगेगा।

इसके बाद वह फोरेंसिक लैब में जाता है तो भी यही प्रक्रिया जारी रहेगी। बता दें कि पुलिस पर पहले इस तरह के आरोप लगते रहे हैं कि जब्त माल या सबूतों के साथ छेड़छाड़ हुई है। जब्त सामग्री को बदला गया है, तरल पदार्थ की जगह पर कोई दूसरा पदार्थ रख दिया गया, उसकी मात्रा को कम कर दिया गया है, अब ये सब नहीं होगा। वजह, जांच के दौरान हर प्रक्रिया डिजिटल माध्यम पर रहेगी। उसकी कई स्तरों पर निगरानी रहेगी।

Chandigarh Police - फोटो : Amar Ujala
चंडीगढ़ की एसएसपी कंवरजीत कौर ने कानूनों के व्यावहारिक इस्तेमाल को लेकर आयोजित प्रदर्शनी में बताया, यह एक लाइव प्रदर्शनी है। इसमें अपराध स्थल की जांच का अनुसरण करते हुए नए कानूनों को अमल में लाया जाता है। तीनों कानूनों की अवधारणा प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण से प्रेरित है। इसमें औपनिवेशिक काल के कानूनों को हटाने के बारे में विचार किया गया था, जो स्वतंत्रता के बाद भी अस्तित्व में रहे। साथ ही, दंड से न्याय पर ध्यान केंद्रित करके न्यायिक प्रणाली को बदलना भी था। इसे ध्यान में रखते हुए, इस कार्यक्रम का मूल विषय 'सुरक्षित समाज, विकसित भारत-दंड से न्याय तक' है।

नए कानूनों में अब जीरो एफआईआर का प्रावधान किया गया है। सीसीटीएनएस के माध्यम से अब ऑनलाइन ट्रांसमीशन रहता है। अगर किसी दूसरे राज्य के व्यक्ति के साथ अपराध हुआ है तो 'भाषा', त्वरित कार्रवाई या जांच में बाधा न बने, इसके लिए 'भाषिणी' एप तैयार किया गया है। इस प्लेटफार्म पर 22 भारतीय भाषाओं में अनुवाद की सुविधा मिलती है। 

पीड़ित और गवाहों के बयान भी वीडियो रिकार्डिंग से दर्ज किए जाएंगे। इसके अलावा महिलाओं और बच्चों से संबंधित अपराधों को सूचना मिलने के दो महीने के भीतन निपटाना होगा। प्रदर्शनी में जांच से लेकर न्याय तक की विभिन्न प्रक्रियाओं की झलक दिखाई गई है। पहली बार कानून के कार्यान्वयन को जनता के सामने प्रदर्शित किया जा रहा है। आपराधिक मामलों में न्याय कैसे दिया जाता है, इस पर फोकस किया गया है।
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