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NEET: 23 लाख नीट छात्रों से जुड़े एक करोड़ मतदाता, विधानसभा चुनावों में किस पर फूटेगा गुस्सा?

अमित शर्मा
Updated Thu, 20 Jun 2024 07:49 PM IST

सार

यदि नीट पेपर लीक मामले में छात्रों का गुस्सा किसी एक राजनीतिक दल के विरोध में गया तो उसे इसका भारी नुकसान हो सकता है। हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनावों में जिस तरह सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहुत करीबी रहा है, युवा छात्रों का यह वोट निर्णायक हो सकता है। 
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नीट परीक्षा में कथित धांधलियों का चुनाव पर पड़ सकता है असर। - फोटो : अमर उजाला।


लेकिन इस मामले का एक पहलू किसी भी राजनीतिक दल की पेशानी पर बल डाल सकता है। इस वर्ष 23.33 लाख से अधिक छात्रों ने नीट की परीक्षा दी है। नीट के छात्र पहली या दूसरी बार के वोटर भी हैं। यदि यह मान लिया जाए कि इन छात्रों और इनके माता-पिता के साथ परिवार में एक भी वयस्क सदस्य है, तो केवल इन छात्रों से सीधे तौर पर लगभग एक करोड़ मतदाता जुड़े माने जा सकते हैं। इसका असर उनके आसपास के अन्य लोगों (मतदाताओं) पर भी पड़ सकता है। 


यदि नीट पेपर लीक मामले में छात्रों का गुस्सा किसी एक राजनीतिक दल के विरोध में गया तो उसे इसका भारी नुकसान हो सकता है। हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनावों में जिस तरह सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहुत करीबी रहा है, युवा छात्रों का यह वोट निर्णायक हो सकता है। संभवतया यही कारण है कि सभी राजनीतिक दल इस मामले पर बहुत सधी बयानबाजी कर रहे हैं।


छह राज्यों के चुनाव आगे हैं

लोकसभा चुनाव 2024 भले ही संपन्न हो गए हैं, लेकिन इसी साल हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर की विधानसभाओं के लिए चुनाव होने हैं। अगले वर्ष दिल्ली और बिहार की विधानसभाओं के लिए चुनाव होने तय हैं। ऐसे में नीट चुनावों का सीधा असर इन छः राज्यों के विधानसभा चुनावों पर पड़ सकता है। 


हरियाणा और महाराष्ट्र में इस बार सत्ता पक्ष, विपक्ष के बीच अच्छा टकराव देखने को मिल सकता है। दिल्ली और बिहार में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कड़ी लड़ाई देखने को मिल सकती है। ऐसे में छात्रों की नाराजगी किसी भी राजनीतिक दल को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। 


इसी बीच कुछ अन्य परीक्षाएं भी लीक हुई हैं। सरकार को कुछ परीक्षाओं को रद्द करना पड़ा है। ऐसे में नाराज छात्रों की संख्या बढ़ सकती है और यह नाराजगी सरकार को भारी पड़ सकती है। राजस्थान विधानसभा चुनाव में बहुत अच्छे कामकाज के बाद भी अशोक गहलोत सरकार का हारने में पेपर लीक से नाराज छात्रों की भूमिका अहम मानी जाती है। आने वाले चुनावों में इसी तरह के असर से इनकार नहीं किया जा सकता। 


किसे दिया वोट

सीएसडीएस-लोकनीति (CSDS) के आंकड़ों के अनुसार हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को लगभग 21 फीसदी युवा मतदाताओं का वोट मिला है। 2019 के लोकसभा चुनावों की तुलना में यह एक फीसदी अधिक है। भाजपा को 2019 में लगभग 40 फीसदी युवा मतदाताओं का वोट मिला था। इस बार उसके 18 वर्ष से 25 वर्ष के युवा मतदाताओं के वोट में एक फीसदी की गिरावट हुई है। 26 वर्ष से 35 वर्ष के युवा मतदाताओं में भाजपा ने दो फीसदी वोट शेयर गंवाया है।    
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छात्रों की पीड़ा समझे सरकार

एक कोचिंग संचालक मोहम्मद आजम ने अमर उजाला से कहा कि सरकार को छात्रों की पीड़ा समझनी चाहिए। छात्र सरकार से कोई विशेष राहत नहीं, बल्कि केवल पारदर्शी पेपर लीक रहित परीक्षा की मांग कर रहे हैं। यह उनका अधिकार है। मो. आजम ने कहा कि नीट की परीक्षा देने वालों में सबसे ज्यादा संख्या गरीब-मध्यम वर्ग के परिवार वालों की ही होती है। अमीर वर्ग के बच्चों की पहली प्राथमिकता उच्च शिक्षा हासिल कर बिजनेस संभालना होता है, जबकि मध्यमवर्गीय बच्चे ही स्वास्थ्य सेवाओं को अपनी पहली पसंद बनाते हैं क्योंकि उनके पास निवेश करने के लिए भारी पूंजी नहीं होती है। ऐसे में सरकार को अपनी पहली प्राथमिकता में रखते हुए उन्हें एक निष्पक्ष प्रयास करने का अवसर देना चाहिए। 
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