तुर्किये और सीरिया में आए विनाशकारी भूकंप में जान गंवाने वालों की संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है। जानकारी के अनुसार, अब तक 19 हजार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। वहीं, घायलों की संख्या भी 80 हजार से ज्यादा बताई जा रही है। बड़ी संख्या में लोग मलबे के नीचे फंसे हुए हैं। भारत ने तुर्किये में भूकंप प्रभावित लोगों की मदद के लिए 'ऑपरेशन दोस्त' चलाया हुआ है। जिसके तहत भारत ने मलबे में फंसे लोगों की मदद के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीम वहां भेजी हुई है, जो बचाव कार्यों में लगी हुई हैं।
भूकंप प्रभावित तुर्किये में एक नाबालिग लड़की की बच्ची की जान बचाने पर राष्ट्रीय रक्षा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की सराहना करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने बृहस्पतिवार को ट्वीट कर कहा, हमें अपनी एनडीआरएफ पर गर्व है। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार एनडीआरएफ को दुनिया का अग्रणी आपदा प्रतिक्रिया बल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। तुर्किये में बचाव अभियान के दौरान एनडीआरएफ टीम-11 ने गाजियांटेप शहर में एक छह वर्षीय लड़की बेरेन की जान बचाई। तुर्किये और उसके पड़ोसी देश सीरिया में छह फरवरी को आए भूकंप से लोग बड़ी संख्या में प्रभावित हुए है।
लोगों की नींद भूकंप से उड़ गई
तुर्की और सीरिया की सीमा के दोनों छोरों पर निवासियों की नींद भूकंप से उड़ गई। ठंडी, बरसात व बर्फीली सर्दियों की रात में लोग बाहर निकल आए क्योंकि झटकों के बाद इमारतें एक तरफ झुक चुकी थीं और मजबूत झटके लगातार जारी थे। कई जगह इमारतें जमींदोज हो गईं। बचाव दल शहरों और कस्बों में मलबे के टीले खोजते दिखे, जहां कई लोगों के चीखने की आवाजें सुनी जा सकती थीं। भूकंप के झटके काहिरा तक महसूस किए गए। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार, भूकंप का केंद्र गजियांतेप से करीब 33 किलोमीटर दूर 18 किलोमीटर की गहराई पर था। यह सीरियाई सीमा से करीब 90 किलोमीटर दूर उत्तर में है। भूकंप के बाद करीब 20 झटके महसूस किए गए, जिनमें से सबसे शक्तिशाली झटका 6.6 की तीव्रता का था। तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने घटना के तुरंत बाद बचाव दलों को मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए हैं। बचावकर्मियों ने कहा कि तनावपूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं और अस्पताल जल्दी ही घायलों से भर गए हैं और मृतक व घायलों की संख्या काफी अधिक हो सकती है।