महाराष्ट्र में सत्ताधारी गठबंधन में भागीदार शिवसेना और एनसीपी के नेता अब गोवा में भी साथ मिलकर चुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं। इसे लेकर दोनों दलों के नेता कल बैठक करेंगे। तटीय राज्य में 14 फरवरी को एक चरण में ही विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होगा। वहीं, मतगणना और परिणामों की घोषणा 10 मार्च को की जाएगी।
गोवा विधानसभा चुनाव में चुनाव पूर्व गठबंधन पर चर्चा करने के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और शिवसेना के नेता मंगलवार को गोवा में बैठक करेंगे। शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने सोमवार को यह जानकारी दी। 40 सदस्यों वाली गोवा विधानसभा के लिए अगले महीने चुनाव होने हैं। दोनों पार्टियां महाराष्ट्र में तीन दलों के सत्ताधारी गठबंधन में भागीदार हैं। महाराष्ट्र सरकार में तीसरी भागीदार कांग्रेस है जिसने गोवा में सीटों पर समझौता करने से इनकार कर दिया है।
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एनसीपी के प्रवक्ता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नवाब मलिक ने सोमवार को कहा कि गोवा में गठबंधन के लिए शिवसेना के साथ अंतिम वार्ताओं के निष्कर्ष का एलान पार्टी के वरिष्ठ एनसीपी नेता प्रफुल पटेल करेंगे। नवाब मलिक ने कहा कि महाराष्ट्र की महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार में मंत्री और एनसीपी के वरिष्ठ नेता जितेंद्र आव्हाड़ गोवा में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए सीटों को लेकर समझौते के मुद्दे पर होने वाले विचार-विमर्श में प्रफुल पटेल के साथ रहेंगे।
एनसीपी ने यूपी में सपा से तो मणिपुर में कांग्रेस से मिलाया है हाथ
मलिक ने कहा कि एनसीपी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी (सपा) और मणिपुर में विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के साथ समझौता किया है। गोवा को लेकर मलिक ने कहा कि कांग्रेस के स्थानीय नेतृत्व ने यहां सीटों का समायोजन करने से इनकार कर दिया है। इसलिए यहां एनसीपी और शिवसेना साथ मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। अगले महीने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा में विधानसभा चुनावों का आयोजन होना है।
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शरद पवार पर टिप्पणी को लेकर देवेंद्र फडणवीस पर बोला हमला
नवाब मलिक ने भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर उनके एक बयान को लेकर हमला बोला। फडणवीस ने कहा था कि एनसीपी ऐसी पार्टी है जिसका प्रभाव महाराष्ट्र से साढ़े तीन जिलों तक ही सीमित है। इसे लेकर नवाब मलिक ने कहा कि जब शरद पवार मुख्यमंत्री थे तब फडणवीस राज्य विधायिका के सदस्य भी नहीं थे। उन्होंने कहा कि शरद पवार पहली बार 1978 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने थे और उसके बाद से कई बार वह इस अहम पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।