आईएनएस विशाखापत्तनम के बाद पनडुब्बी आईएनएस वेला भी आज भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल हो गई। इससे समुद्र में भारतीय नौसेना की ताकत और बढ़ेगी। चौथी स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बी आईएनएस वेला मुंबई में नौसेना डॉकयार्ड में भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह की उपस्थिति में नौसेना में शामिल हुई।
इस मौके पर करमबीर सिंह ने आज की जटिल सुरक्षा स्थिति को देखते हुए, इसकी क्षमता और मारक क्षमता भारत के समुद्री हितों की रक्षा के लिए नौसेना की क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे पहले 21 नवंबर को आईएनएस विशाखापत्तनम भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल हुआ था।
चीन और पाकिस्तान के गठजोड़ पर पैनी निगाह
उन्होंने कहा कि आईएनएस वेला में पनडुब्बी संचालन के पूरे स्पेक्ट्रम को शुरू करने की क्षमता है। भारतीय नौसेना के प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने कहा कि चीन और पाकिस्तान के गठजोड़ पर हमारी पैनी निगाह है। चीन से काफी हथियार पाकिस्तान को निर्यात हो रहे हैं। इससे यहां के क्षेत्रीय सुरक्षा पर काफी फर्क पड़ेगा। इसके लिए हमें सतर्क रहना पड़ेगा।
भारतीय नौसेना की ताकत और बढ़ेगी
करमबीर सिंह ने आगे कहा कि आईएनएस वेला के आने के बाद से भारतीय नौसेना की ताकत और अधिक अधिक बढ़ जाएगी। इससे देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को और मजबूत किया जा सकेगा। वहीं, उन्होंने प्रोजेक्ट 75 का जिक्र करते हुए कहा कि इससे भारत और फ्रांस के संबंध और अधिक मजबूत होंगे। करमबीर सिंह ने कहा कि हाल ही में भारत ने अपने स्वदेशी एयरक्राफ्ट आईएनएस विक्रांत का सफलतापूर्वक समुद्र में ट्रायल शुरू कर दिया है। अगस्त 2022 तक इसको भारतीय नौसेना में शामिल भी किया जा सकता है। बता दें कि आईएनएस वेला एक स्कॉर्पीन क्लास की सबमरीन है। भारत सरकार ने 2005 में फ्रांसीसी कंपनी मेसर्स नेवल ग्रुप (पहले डीसीएनएस) के साथ करार किया था।
आईएनएस वेला की खासियतें
- आईएनएस वेला कलावरी क्लास की चौथी सबमरीन है।
- यह 221 फीट लंबी, 40 फीट ऊंची और 1565 टन वजनी है।
- आईएनएस वेला 6500 नॉटिकल माइल्स यानी करीब 12000 किमी का रास्ता तय कर सकती है।
- आईएनएस वेला 350 मीटर तक की गहराई में भी जाकर दुश्मन का पता लगा सकती है।
- आईएनएस वेला के अंदर एडवांस वेपन हैं, जो युद्ध जैसे समय में आसानी से दुश्मनों के छक्के छुड़ा सकते हैं।
- आईएनएस वेला सबमरीन को 'साइलेंट किलर' भी कहा जा सकता है।