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'पाक के खिलाफ आजादी का संघर्ष कर रहे बलूचिस्तान में तेज हो सकता है उग्रवाद'

Mon, 02 Dec 2019 03:54 AM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद

सार

  • ‘पाकिस्तान : बलूचिस्तान पहेली’ सेमिनार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार परिषद के सदस्य का दावा 
  • तिलक देवाशर का मानना है कि पाकिस्तानी राज्य में युवा पीढ़ी के हाथ में आ रहा संघर्ष का नेतृत्व
  • कहा- बलूची जनसंख्या की एक के बाद एक पीढ़ी उग्रवादी गतिविधियों के साथ विद्रोह कर रही है
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बलूचों का विरोध (फाइल फोटो) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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पाकिस्तान के खिलाफ आजादी का संघर्ष कर रहे बलूचिस्तान में उग्रवाद के और तेज होने के आसार हैं, क्योंकि पाकिस्तान सरकार के खिलाफ संघर्ष का नेतृत्व अब वर्तमान पीढ़ी के युवा और तेजतर्रार नेताओं के हाथों में आ गया है। यह आकलन केंद्र सरकार की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार परिषद (एनसैब) के सदस्य तिलक देवाशर का है।

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देवाशर रविवार को यहां एक सेमिनार में मौजूद थे, जिसका विषय ‘पाकिस्तान : बलूचिस्तान पहेली’ रखा गया था। उन्होंने सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा, बलूची जनसंख्या की एक के बाद एक पीढ़ी उग्रवादी गतिविधियों के साथ विद्रोह कर रही है और पाकिस्तानी प्रशासन में अपना विश्वास खो रही है। उन्होंने कहा, पाकिस्तान एक राजनीतिक हल तलाशने के बजाय अपनी ताकतवर सेना के बूते पर विद्रोह को कुचलने की कोशिश कर रहा है। 

सेमिनार के आयोजक सामाजिक संगठन सोशल कॉज की तरफ से जारी बयान में देवाशर के हवाले से कहा गया है कि पाकिस्तानी सेना और सरकार, दोनों के लिए विद्रोह असली समस्या नहीं है बल्कि बलूची राष्ट्रवाद असली चुनौती है। उन्होंने कहा, बलूची लोग आर्थिक शोषण और गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों समेत कई तरीके का अत्याचार सह रहे हैं। एक दशक से बड़े पैमाने पर युवा कार्यकर्ताओं को गायब किया जा रहा है और उनका केवल शव ही मिलता है। 
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देवाशर ने आगे कहा कि बलूची लोग अब अपनी पहचान खोने की आशंका से जूझ रहे हैं और पाकिस्तानी नेतृत्व को चुनौती देने के बारे में सोच रहे हैं ताकि वे उसके बिना जीवित रहकर तरक्की कर सकें।

बलूच में सैन्य कार्रवाई बनाएगी एक और बांग्लादेश

देवाशर ने पाकिस्तान को सेना के जरिये बलूचिस्तान की समस्या हल करने के लिए चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यह एक और बांग्लादेश के निर्माण को बढ़ावा दे सकती है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के गठन के बाद धर्म के आधार पर पाकिस्तान के निर्माण की अवधारणा प्रासंगिक नहीं रह गई है।

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