चिकित्सा छात्रों ने देश के 10 लाख परिवारों को गोद लिया है। एमबीबीएस की पढ़ाई करते हुए ये छात्र आगामी पांच वर्ष तक इन परिवारों का ध्यान रखेंगे। नियमित स्वास्थ्य जांच और बीमारी की पहचान होने पर उन्हें अस्पताल में इलाज की सलाह भी देंगे। साथ ही गैर संचारी रोगों से बचाव को लेकर परिवार की जीवनशैली व खानपान पर विशेष ध्यान भी रखेंगे। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने मंगलवार को साल 2022 से लागू पारिवारिक दत्तक ग्रहण कार्यक्रम (एफएपी) के दो साल की रिपोर्ट साझा की है। इसके मुताबिक, दो लाख से ज्यादा एमबीबीएस छात्रों ने यह जिम्मेदारी ली है।
पांच साल बाद सौंपनी होगी रिपोर्ट
आयोग के वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि एफएपी कार्यक्रम की प्राथमिक जिम्मेदारी मेडिकल कॉलेजों की है, जो अपने आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को सबसे पहले गोद लेंगे। पांच वर्ष तक कॉलेज प्रबंधन इस पर काम करेगा और अंतिम वर्ष तक पहुंचने के बाद छात्रों को गोद लिए परिवारों की पांच साल की स्थिति को लेकर एक रिपोर्ट भी सौंपनी होगी। यह कार्यक्रम 2022 से शुरू हुआ है। इसलिए पहली समीक्षा 2027 को होगी।
तमिलनाडु सबसे आगे, दूसरे नंबर पर कर्नाटक
देश में सबसे ज्यादा 74 मेडिकल कॉलेज तमिलनाडु में हैं, जिनमें 11,600 एमबीबीएस छात्र हर साल प्रवेश ले रहे हैं। यहां 1.18 लाख परिवारों को गोद लिया गया। कर्नाटक में 70 कॉलेज हैं, लेकिन यहां सबसे ज्यादा 11,690 सीटे हैं। यहां करीब 1.26 लाख परिवारों को गोद लिया गया। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में 1.85 लाख परिवारों को गोद लिया गया है।
50 लाख परिवार होंगे निगरानी में
देश में कुल 704 मेडिकल कॉलेज हैं, जिनमें 1,07,948 सीटे हैं। हर साल प्रवेश लेने वाले छात्रों को पूरी पढ़ाई के दौरान पांच परिवारों को गोद लेना है। इस तरह अगले पांच साल में देश के करीब 50 लाख से ज्यादा परिवार चिकित्सा छात्रों की निगरानी में होंगे।
दुनिया का इकलौता कार्यक्रम एनएमसी का मानना है कि यह दुनिया का ऐसा इकलौता कार्यक्रम है, जिसके जरिये डॉक्टर और परिवार के बीच घरेलू संबंध स्थापित होंगे। पांच साल तक परिवार से संपर्क में रहने के बाद उक्त छात्र अगर किसी अन्य जिले या राज्य में प्रैक्टिस करता है तब भी यह परिवार उसके संपर्क में रहेगा और चिकित्सा सलाहकार के रूप में उनका सहयोग करता रहेगा।